मुंबई, बुल्ली बाई मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस की सायबर सेल जब इस एप्लिकेशन को चलाने वाले कथित मुख्य आरोपी नीरज बिश्नोई से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर थी तभी दिल्ली पुलिस ने उसे पकड़ लिया था. सूत्रों ने बताया की मुंबई पुलिस ने तीन लोगों श्वेता सिंह, विशाल कुमार झा और मयंक रावल को गिरफ़्तार किया था. उनसे पूछताछ के दौरान ही उन्हें बिश्नोई की जानकारी मिली थी. जिसके बाद पुलिस की एक टीम असम रवाना की गई थी ताकि वो बिश्नोई को गिरफ़्तार कर सके. लेकिन मुंबई पुलिस जब तक वहां पहुंचती दिल्ली पुलिस ने उसे अपने हिरासत में ले लिया था. मुंबई पुलिस ने सूत्रों को बताया की 2 जनवरी को जिस समय यह मामला दर्ज हुआ था उसके अगले ही पल पुलिस ने ट्विटर को लेखकर @Giyu44 के बारे में जानकारी मांगी थी पर ट्विटर ने मुंबई पुलिस के साथ इसकी जानकारी साझा नही की थी.
आपको बता दें की @giyu44 नाम का ट्विटर हैंडल बिश्नोई चलाता था, और अगर ट्विटर ने उसकी जानकारी पुलिस से साझा की होती तो आरोपी बहुत ही जल्द सलाख़ों के पीछे होता. मुंबई पुलिस के एक अधिकारी ने बताया की ट्विटर की महिला सुरक्षा को लेकर बहुत ही स्ट्रिक्ट गाइडलाइन है. वह जांच एजेंसियों का सहयोग करते हैं पर इस मामले में 10 बार के क़रीब ट्विटर से मुंबई पुलिस ने जानकारी मांगी थी पर वो जानकारी ट्विटर ने पुलिस के साथ साझा नहीं की थी. पुलिस ट्विटर के ग्रीवांस अधिकारी के संपर्क में भी थी पर वहां से भी उन्हें कुछ मदद नहीं मिल सकी थी.
मुंबई पुलिस सूत्रों ने बताया की विशाल कुमार झा खालसा सुप्रेमेसिस्ट नाम के ट्विटर हैंडल का इस्तेमाल कर बुल्ली बाई एप्लिकेशन का इस्तेमाल करता था. उसने इस ट्विटर हैंडल के नाम पिछले 4 महीनों में 16 बार बदला था ताकि वो किसी की नज़र में ना आए. इसके अलावा sage, बुली बाई और सिख खालसा नाम के ट्विटर अकाउंट को श्वेता ने तैयार किया था और जतिंदर सिंह बुल्लर नाम के ट्विटर अकाउंट को मयंक रावत चलाता था.





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