मुंबई, कोरोना महामारी की रोकथाम में कारगर भूमिका निभाने वाली सीरम इंस्टिट्यूट कंपनी के कोविशील्ड टीके की २० करोड़ खुराकें सितंबर महीने में खराब यानी एक्सपायर हो जाएंगी। अकेले महाराष्ट्र में कोविशील्ड की ३४ लाख खुराकें अगस्त में एक्सपायर हो रही हैं। बता दें कि यह टीका नौ महीनों में ही एक्सपायर हो जाता है। दूसरी तरफ बताया जा रहा है कि टीके के ज्यादा वक्त तक कारगर होने के प्रमाण मिल रहे हैं। इसलिए समय-समय पर इस्तेमाल की अवधि को बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
जानकारी के अनुसार सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास कोविशील्ड की करीब २० करोड़ खुराकें हैं, जिन्हें दिसंबर में बनाया गया था। ये खुराकें सितंबर में एक्सपायर हो जाएंगी। इन खुराकों को खपाने की योजना सफल नहीं रही तो कंपनी को इन्हें नष्ट करना पड़ेगा। हालांकि पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर कंपनी के सीईओ अदर पूनावाला ने संकेत दिया था कि कंपनी की कम से कम २० करोड़ खुराकें बर्बाद हो जाएंगी। कंपनी को इन्हें नष्ट करना होगा क्योंकि उनकी अवधि इस साल अगस्त-सितंबर में खत्म होने जा रही है।
अकेले महाराष्ट्र की बात करें तो यहां कोविशील्ड की कुल ३४ लाख खुराकें पड़ी हुई हैं। इन टीकों की अवधि अगस्त में खत्म हो जाएगी। इसी तरह वैक्सीन की करीब ९,८९५ खुराक जून में एक्सपायर हो रही है। राज्य के टीकाकरण अधिकारी सचिन देसाई के मुताबिक इस स्टॉक का इस्तेमाल किया जाएगा क्योंकि टीकाकरण की रफ्तार बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पिछले १० दिनों से रोजाना औसतन करीब एक लाख टीके लग रहे हैं। यह पहले ६० हजार के आस-पास था। बताया गया है कि एक्सपायरी से पहले ही को वैक्सीन के स्टॉक को खत्म कर दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक भारत बायोटेक पिछले कुछ महीनों से टीके का स्टॉक बेचने और एक्सपायर हो चुकी खुराकों की मात्रा घटाने के लिए निजी अस्पतालों के साथ मिलकर काम कर रही है। एक्सपायर हो चुकी खुराकों की जगह दूसरी खुराक दी जा रही है। साथ ही स्टॉक खपाने में मदद भी की जा रही है।





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