मुंबई, मंकीपॉक्स का पहला केस केरल के कोल्लम में मिलने की पुष्टि होते ही केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर इस बीमारी से आगाह किया है और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके बाद मुंबई मनपा ने मंकीपॉक्स को मात देने के लिए सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। इसके तहत बीमारी के आने से पहले ही कस्तूरबा अस्पताल में २८ बेडवाला विशेष वॉर्ड बनाया है।
केंद्र सरकार ने दिशा-निर्देश में कहा है कि सभी संदिग्धों की निगरानी और उनकी टेस्टिंग की जानी चाहिए और बेहतर सर्विलांस की व्यवस्था होनी चाहिए। संक्रमित और संदिग्ध मरीज को आइसोलेशन में रखना होगा। साथ ही मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित होनेवाले मरीज के लिए समय पर बेहतर इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए। इस बीमारी के लक्षण दिखने में ६ से १३ दिन लग जाते हैं। हालांकि यह वायरस स्मॉलपॉक्स की तरह गंभीर नहीं है, लेकिन इसका अब तक कोई इलाज नहीं है। मनपा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मंकीपॉक्स से बचाव के लिए सभी संदिग्ध मरीजों की एंट्री प्वाइंट पर स्क्रीनिंग और जांच के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंकीपॉक्स एक विषाणुजनित बीमारी हैै। यह पॉक्स विरिडे परिवार के ऑर्थाेपॉक्स वायरस जींस से संबंधित है। यह संक्रमण किसी संक्रमित व्यक्ति, जानवर या वायरस से दूषित किसी भी चीज के माध्यम से इंसानों में फैलता है।
फिलहाल मुंबई मनपा की तरफ से सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि स्थानीय क्षेत्रों से आनेवाले रोगियों और जिन्हें कोई भी बीमारी नहीं है, ऐसे यात्रियों की स्क्रीनिंग की जाए। महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार यात्रियों के नमूने परीक्षण के एनआईवी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे) प्रयोगशाला में भेजे जाएंगे। साथ ही यह निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध मरीजों को कस्तूरबा अस्पताल भेजा जाए।





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