मुंबई, हाल ही में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार विपक्षी सांसदों की जुबान बंद करने की कोशिश में जुट गई थी। इसके लिए नई गाइडलाइन जारी की गई, जिसमें संसद में उन शब्दों पर पाबंदी लगाने की बात कही गई थी, जिनका भाजपा के लोग कभी बेझिझक उपयोग करते थे। पहले सांसदों की जुबान बंद की गई और अब अभिव्यक्ति की आजादी भी गुलामी की ओर जा रही है। दरअसल अब सरकार ने ७८ यूट्यूब चैनल पर बैन लगा दिया है। ये वो यूट्यूब चैनल हैं, जो केंद्र के खिलाफ खबरें चलाते थे। ये कार्रवाई आईटी एक्ट २००० की धारा ६९ए के उल्लंघन के आरोप में की गई है। सूचना प्रसारण मंत्री ने मंगलवार को ७८ यूट्यूब न्यूज चैनल और उनके सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने का आदेश जारी कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक सरकार २०२१ और २०२२ के बीच अब तक ५६० यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक कर चुकी है। इससे पहले २५ अप्रैल को १६ यूट्यूब चैनल बैन किए थे।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय इससे पहले भी यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक करने की कार्रवाई कर चुका है। अप्रैल में भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित दुष्प्रचार फैलाने को लेकर १६ यूट्यूब चैनलों को ब्लॉक कर दिया गया था। इनमें १० चैनल भारतीय और ६ पाकिस्तान आधारित यूट्यूब चैनल थे। आईटी नियम, २०२१ के तहत इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन्हें ब्लॉक किया गया था। मंत्रालय का कहना है कि ये सभी चैनल भारत में दहशत पैदा करने, सांप्रदायिक विद्वेष भड़काने और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए झूठी, असत्यापित जानकारी फैला रहे थे, जबकि हकीकत ये है कि ये चैनल भाजपा सरकार के खिलाफ खबरें चलाते थे, जिसे लेकर भाजपा सरकार की बहुत किरकिरी भी होती थी। ब्लॉक किए गए यूट्यूब समाचार चैनलों की दर्शकों की संख्या ६८ करोड़ से अधिक थी।





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