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डोमेन पर ‘रेड अल्फा’ का हमला, रिकॉर्डेड फ्यूचर ने दी चौंकाने वाली रिपोर्ट

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मुंबई, दूसरे देशों के खिलाफ चीन हमेशा खुराफात में लगा रहता है। यही वजह है कि विस्तारवादी ड्रैगन से हर पड़ोसी देश परेशान रहता है, फिर चाहे वह उसका मित्र ही क्यों न हो। फिलहाल ताइवन को लेकर अमेरिका के साथ चल रही तनातनी के बीच चीन की खुराफात हिंदुस्थान के खिलाफ भी जारी ही है। चीन अब हिंदुस्थान को जमीन के साथ-साथ साइबर स्पेस में टारगेट कर रहा है।
इसको लेकर एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीनी सरकार से जुड़े हैकिंग ग्रुप्स सरकार, एनजीओ, न्यूज पब्लिकेशन और ग्लोबली थिंक टैंक को भी टारगेट कर रहे हैं। इनके निशाने पर भारत सरकार के लिए आईटी इंप्रफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस मैनेज करनेवाला ‘नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर’ (एनआईसी) भी शामिल है। ‘रेड अल्फा’ नामक चीनी हैकर्स का समूह ईमेल्स भेजता है और उनके मेल को ओपन करनेवालों के लॉगिन डिटेल्स चुरा लेता है। ये समूह एनआईसी के लॉगिन पेज को लगातार सर्च करता रहता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस हैकिंग ग्रुप ने पिछले साल कम से कम ३५० डोमेन को टारगेट किया है। इसके अलावा ये चीनी-स्पॉन्सर्ड हैकिंग ग्रुप ने इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स (एफआईडीएच), एमनेस्टी इंटरनेशनल, मर्केटर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज (एमईआरआईसीएस), रेडियो फ्री एशिया (आरएफए), अमेरिकन इंस्टीट्यूट इन ताइवान (एआईटी) जैसे संगठनों को भी टारगेट किया है। ये हैकिंग ग्रुप तिब्बती और उइगर समुदायों के व्यक्तियों और संगठनों सहित जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों को सीधे निशाना बनाने में लगा हुआ है। पिछले तीन वर्षों में रेड अल्फा लगातार क्रेडेंशियल-फिशिंग एक्टिविटी कर रहा है।
फटाफट लोन के बदले देश के कई हिस्सों में वसूली करने वाले रैकेट में शामिल २२ लोगों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। खास बात ये है कि लखनऊ स्थित एक कॉल सेंटर से संचालित हो रहे इस रैकेट को चीनी नागरिक चला रहे थे। ये लोग करीब १०० मोबाइल ऐप्स के जरिये ग्राहकों का संवेदनशील डाटा जुटाते थे और इसे चीन और हांगकांग में स्थित सर्वर में अपलोड करते थे। पुलिस पिछले दो महीनों से इस रैकेट पर नजर रख रही थी। इनका नेटवर्क दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों तक फैला हुआ है। रैकेट में शामिल आरोपी मोबाइल ऐप के जरिए ग्राहकों को छोटा लोन देते थे। ग्राहक जब मोबाइल ऐप्स डाउनलोड कर उसे जरूरी परमिशन देते तो कुछ ही मिनटों में लोन उसके खाते में पहुंच जाता था। इसके बाद ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू होता था। दिल्ली पुलिस के अधिकारी केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि ऐप्स के जरिए लोन देते थे। बाद रैकेट में शामिल आरोपी अलग-अलग नंबर से फोन करके अश्लील तस्वीरें इंटरनेट पर शेयर करने की धमकी देकर लोगों से वसूली करते थे। बदनामी के डर से ग्राहक इन्हें पैसे चुकाते रहते थे, जिन्हें बाद में हवाला के जरिए चीन भेजा जाता था।