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गणेश उत्सव में १० दिनों तक डूबे रहेंगे भक्त

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मुंबई, सुख व समृद्धि के देवता गणपति के जन्मोत्सव के जश्न की शुरुआत ३१ अगस्त यानी आज से हो रही है। आम भाषा में इसे गणेश चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। भाद्र महीने की चतुर्थी से शुरू होनेवाला यह गणेश उत्सव १० दिनों तक चलेगा। १० दिनों तक चलने वाले गणेश उत्सव में भक्त गणेश भक्ति में डूबे रहेंगे। उत्सव के आरंभ में लोग शुभ मुहूर्त में संपूर्ण विधि विधान व अनुष्ठान के साथ भगवान गणपति की प्रतिमा को अपने घर व दफ्तरों में लाकर उनकी स्थापना करते हैं। यह पर्व बहुत ही धूमधाम और हर्षाेल्लास के साथ देशभर में मनाया जाता है।
भगवान गणेश के जन्मोत्सव की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अपनी माता पार्वती की आज्ञा का पालन करने के लिए बाल गणेश से भगवान शंकर इतने क्रोधित हो गए कि उन्होंने आवेश में आकर बालक गणेश के सिर को अपने त्रिशूल से काट दिया। कहा जाता है कि त्रिशूल का वेग इतना था कि बालक गणेश का शीश पृथ्वी से होता हुआ सीधे पाताल में जा गिरा, जहां बालक गणेश का मस्तक गिरा उसे आज पाताल गुफा के नाम से जाना जाता है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित पाताल भुवनेश्वर मंदिर उसी जगह है। मान्यताओं के अनुसार पाताल भुवनेश्वर में गणपति जी का कटा हुआ सिर आज भी मौजूद है। बालक गणेश का शीश काटने के बाद भगवान शिव को अपनी गलती का एहसास हुआ लेकिन त्रिशूल से कटे हुए सिर को दोबारा नहीं जोड़ा जा सकता था। इसलिए सृष्टि में एक ऐसे बालक की खोज शुरू हुई, जिसकी माता उससे पीठ करके सो रही हो। ऐसे में सारी सृष्टि में खोजने के बाद एक मादा हाथी मिला, जो अपने बच्चे से पीठ करके सो रही थी, जिसके चलते देवता उस हाथी के बच्चे का सिर काटकर ले आए और फिर भगवान शिव ने बालक गणेश के शरीर पर हाथी का मस्तक जोड़कर उन्हें नया जीवन प्रदान किया। तभी से भाद्र महीने की चतुर्थी तिथि को भगवान श्री गणेश के हाथी के सिर वाले रूप के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाने लगा। इस १० दिवसीय पर्व को भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले हिंदू बहुत ही श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। महादेव और माता पार्वती के सबसे छोटे बेटे गणेश रिद्धि-सिद्धी के दाता हैं। हिंदुओं में कोई भी शुभ काम शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश को देवताओं में सबसे पहले पूजन कराने का अधिकार प्राप्त है।