मुंबई, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार के ऊपर तगड़ा जुर्माना लगाया है। जुर्माने की रकम है 12000 करोड़ रुपए। शिंदे सरकार के ऊपर यह जुर्माना पर्यावरण मानदंडों का पालन न करने के लिए लगाया गया है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने राष्ट्रीय हरित मध्यस्थता अधिनियम की धारा 15 के तहत यह जुर्माना लगाया है। मामला पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन ढंग से नकहीं करने का है। पिछले आठ साल से, महाराष्ट्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जरूरी काम नहीं किया है।
ग्रीन आर्बिट्रेटर ने कहा है कि इस संबंध में दी गई डेडलाइन भी खत्म हो चुकी है। भविष्य में पर्यावरण को लगातार हो रहे नुकसान को रोका जाए। हरित मध्यस्थ ने कहा कि इसलिए अतीत में पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। महाराष्ट्र सरकार पर तरल अपशिष्ट प्रबंधन में चूक के लिए 10,820 करोड़ रुपये और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में विफलता के लिए 1,200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। हरित अधिकरण ने कहा है कि महाराष्ट्र सरकार जुर्माने की राशि अगले दो महीने में जमा कराए और इसका इस्तेमाल मुख्य सचिव के निर्देशानुसार पर्यावरण संरक्षण के लिए किया जाए।
सुझाव दिए गए हैं कि पर्यावरण संरक्षण में अपशिष्ट प्रबंधन, सीवेज प्रबंधन और पुन: उपयोग प्रणाली, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली, ग्रामीण क्षेत्रों में कीचड़ प्रबंधन आदि पर राशि खर्च की जानी चाहिए। उधर, ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा है कि प्रदेश में 84 स्थानों पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट लगाए जाएं। देखना होगा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार क्या भूमिका निभाती है। ग्रीन आर्बिट्रेटर ने फैसले में मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी तय की है। हरित मध्यस्थ ने सुझाव दिया है कि पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम लागू किया जाना चाहिए।





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