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दस दिन बाद या तो विजय जुलूस निकलेगा या मेरी अंतिम यात्रा, मनोज जरांगे का महाराष्ट्र सरकार को अल्टीमेटम

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मुंबई। संपूर्ण मराठा समाज को कुनबी मराठा का दर्जा देकर ओबीसी कोटे में आरक्षण की मांग कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने शनिवार को एक बड़ी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि 10 दिन बाद या तो मराठा समाज का विजय जुलूस निकलेगा या मेरी अंतिम यात्रा। वह पिछले महीने अपनी इसी मांग को लेकर 17 दिन का अनशन कर चुके हैं। सितंबर में जालना जिले के जिस अंतरवली सराटी गांव में पाटिल ने मराठा आरक्षण की मांग करते हुए 17 दिन अनशन किया था, उसी स्थान पर उन्होंने मराठा समाज की एक बड़ी रैली को संबोधित किया। रैली में काफी संख्या में लोग जुटे। खास बात यह कि इस रैली से ठीक 30 दिन पहले उन्होंने राज्य सरकार को मराठा आरक्षण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 40 दिन का समय दिया था। अब यह अवधि पूरी होने में सिर्फ 10 दिन का समय बाकी है। इसी की ओर संकेत करते हुए मनोज जरांगे ने कहा, मनोज जरांगे का उद्देश्य सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाना है कि या तो वह मराठा समाज के लिए आरक्षण का नया कोटा सुनिश्चित करवाए या उन्हें कुनबी मराठा का दर्जा देकर ओबीसी कोटे के तहत ही आरक्षण दिलवाए।
क्या कुछ बोले मनोज जरांगे?
उन्होंने कहा कि अब हम और इंतजार नहीं कर सकते। मराठा समुदाय को पृथक कोटे से आरक्षण दिलवाया जाए तो हम इसे स्वीकार करेंगे, लेकिन यदि निर्धारित 50 प्रतिशत आरक्षण कोटे की सीमा नहीं लांघी जा सकती, तो सभी मराठों को कुनबी का दर्जा देकर उन्हें ओबीसी कोटे के अंतर्गत ही आरक्षण दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह सुझाव भी दिया कि सरकार को हर 10 साल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का एक सर्वेक्षण करवाना चाहिए। इसमें आरक्षण का लाभ लेकर जो लोग क्रीमी लेयर में आ चुके हों, उनका आरक्षण बंद करने पर विचार करना चाहिए। जरांगे ने पिछले माह अपना अनशन खत्म करने के बाद एवं इस रैली से पहले पूरे महाराष्ट्र का दौरा भी किया था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। महाराष्ट्र में मराठा समाज की आबादी 32 प्रतिशत के करीब है। मनोज जरांगे पाटिल इस समाज को आरक्षण दिलवाने के लिए अनशन और आंदोलन कर एक मराठा मुख्यमंत्री एवं एक मराठा उप मुख्यमंत्री वाली सरकार को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर चुके हैं।