मुंबई, प्रशासन की अनदेखी के चलते मनपा अस्पताल बिलख रहे हैं और इस दुर्दशा के शिकार मरीज हो रहे हैं। इसके बाद शिव आरोग्य सेना प्रमुख ने चिकित्सा अधिकारी के समक्ष अस्पतालों की समस्याओं की पोटली खोल दी है। साथ ही इन दिक्कतों को तुरंत सुलझाने का अनुरोध भी किया है।
बीते कुछ दिनों से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पक्ष की शिव आरोग्य सेना ने मुंबई के केईएम, सायन, नायर, कूपर, राजावाड़ी अस्पताल, संत मुक्ताबाई अस्पताल, गोवंडी के शताब्दी अस्पताल, कुर्ला के भाभा अस्पताल और देवनार प्रसूति अस्पताल समेत विभिन्न अस्पतालों का दौरा किया और वहां के डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों और मरीजों की समस्याओं के साथ ही मौजूद खामियों को जाना। इस दौरान पाया गया कि अस्पतालों में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक नहीं था। डॉक्टरों और नर्सों के साथ ही हेल्थ वर्करों की भारी कमी पाई गई। यह भी देखा गया कि आवश्यक उपकरणों की कमी के साथ ही एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, अल्ट्रा साऊंड के लिए भी मरीजों को भारी कसरत करनी पड़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, दवाएं और उपकरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि, सरकार की तरफ से अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है। साथ ही इसका बोझ स्वास्थ्य कर्मियों पर डाला जा रहा है। शिव आरोग्य सेना के मुंबई उपनगर (पूर्व) के सह-संयोजक प्रकाश वाणी ने कहा कि कोरोना में अपनी जान की परवाह किए बिना आम लोगों की जान बचाने वाले स्वास्थ्य कर्मियों और प्रशासनिक तंत्र के साथ शिव आरोग्य सेना मजबूती से खड़ी है।
शिव आरोग्य सेना के डॉ. किशोर ठाणेकर और महाराष्ट्र राज्य समन्वयक जितेंद्र सकपाल के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने मनपा की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या ठाकुर से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन दिया। ज्ञापन में अस्पतालों में व्याप्त सभी समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान करने का अनुरोध भी किया गया। डॉ. विद्या ठाकुर ने सकारात्मकता दिखाई और आश्वासन दिया कि समस्या के समाधान के लिए वे पूरा प्रयास करेंगी।





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