पालघर, जिले के विभिन्न स्कूलों की बसों में बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह ढोया जा रहा है। परिवहन नियमों को ताक पर रखकर स्कूली बच्चों को वैन व ऑटो में धड़ल्ले से ढोया जा रहा है। ऐसे में वाहनचालक मासूमों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऑटो में ५ की जगह ८ से ९ बच्चे जबकि वैन में ८ की जगह १२ से १४ बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। ऐसे ही स्कूल बस भी बच्चों से खचाखच भरी रहती है। हालत यह है कि कई स्कूली वाहन क्षमता से दो गुना बच्चों को बैठाकर लाने-लेजाने का काम कर रहे हैं। कुछ स्कूलों को छोड़ दे तो अधिकतर में फिटनेस, पंजीयन, फस्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, वाहन का रंग व नंबर सब गायब हैं।
स्कूल के इन वाहनों में बच्चों की देखभाल के लिए कोई कर्मचारी भी नहीं रहता है। ज्यादातर स्कूली बसों और वैन, रिक्शा में प्राथमिक उपचार की कोई सुविधा नहीं रहती है। स्कूली बसों के चालकों द्वारा ट्रैफिक नियमों की अनदेखी की जाती है। इसके बावजूद परिवहन विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए है। जिसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ता है।
जिले में स्कूली वाहनों की घोर कमी के कारण बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को ऑटो, टाटा मैजिक, आदि वाहनों में जैसे-तैसे स्कूल भेजने पर मजबूर हैं। वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों के ढोए जाने से हमेशा ही दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ओवर लोडिंग का नजारा भी क्षेत्र में आम है। इसका सबसे अधिक प्रभाव बोईसर, दहाणू, पालघर इलाके में देखा जाता है। एक ऑटो में करीब १५ स्कूली बच्चों को ढोया जाता है।
इस बारे में पालघर ट्रैफिक पुलिस के प्रभारी आसिफ बेग का कहना है कि ओवरलोडेड वाहनों की जांच की जाती है। समय-समय पर स्कूल के प्राचार्य और वाहन मालिकों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए जाते हैं। नियम तोड़ने वाले वाहनों पर कार्रवाही की जाती है।





Users Today : 3
Users Yesterday : 7
Users Last 7 days : 61
Users Last 30 days : 282
Users This Month : 110
Users This Year : 2892
Total Users : 64099
Views Today : 7
Views Yesterday : 11
Views Last 7 days : 82
Views Last 30 days : 384
Views This Month : 141
Views This Year : 3456
Total views : 99479
Who's Online : 2


