Home Maharashtra छात्रों की अमानत राशि; विधानमंडल में जन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवाल

छात्रों की अमानत राशि; विधानमंडल में जन प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवाल

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मुंबई, राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एडमिशन के समय छात्रों से अमानत राशि जमा कराई जाती है, लेकिन कई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद भी पैसे वापस नहीं लेते हैं। इसलिए यह राशि कॉलेजों के पास ही पड़ी रहती है। ऐसे में इस अव्ययित निधि के आवंटन की नीति निर्धारित की गई है। इसके अनुसार, यदि कोई छात्र शिक्षा पूरी होने के बाद दो साल के भीतर अमानत राशि वापस नहीं लेता है तो विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को यह राशि खर्च करने की अनुमति दी गई है। इस निधि का उपयोग पुस्तकालय की किताबें, प्रयोगशाला अद्यतन, शिक्षा, गैर शिक्षा कर्मचारी प्रशिक्षण जैसे कार्यों के लिए किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में छात्रों के हाथ मलने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचेगा।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालयों, कॉलेजों को छात्र की शिक्षा पूरी होने के बाद अमानत राशि वापस करनी होती है, लेकिन इसके लिए आवेदन करने जैसी तकनीकी प्रक्रिया छात्रों को खुद ही करनी पड़ती है। इन झंझटों से बचने के लिए कई छात्र अमानत राशि वापस ही नहीं लेते हैं। इसलिए यह राशि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पास वैसे ही पड़ी रहती है। ऐसे में सूचना के अधिकार से यह जानकारी सामने आई है कि कई छात्रों की अमानत राशि के लाखों रुपए कई वर्षों से विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पड़े हुए हैं। इसी के तहत विधानमंडल में जन प्रतिनिधियों द्वारा सवाल उठाए गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में अमानत राशि के आवंटन की नीति निर्धारित की गई। इतना ही नहीं उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है।
छात्र शिक्षा पूरी होने के बाद प्रमाणपत्रों की प्रतियां लेने के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय आते हैं। उसी समय छात्रों को पैसे वापस कर देने चाहिए। पास होने के बाद छात्र दो साल के भीतर अमानत राशि नहीं निकालते हैं अथवा इसकी मांग नहीं करते हैं, तो यह राशि कॉलेज, विश्वविद्यालय में ही जमा कर दी जाएगी। दो साल पहले बची अमानत राशि का उपयोग कॉलेज खर्च के लिए कर सकते हैं। सभी कुलपतियों, महाविद्यालयों के प्राचार्यों को वित्तीय प्राधिकार की सीमा के अंतर्गत अमानत राशि खर्च करने का अधिकार होगा। हालांकि, सरकार के पैâसले में यह भी कहा गया है कि वित्तीय सीमा से अधिक खर्च की मंजूरी का अधिकार संबंधित विभागीय संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक को होगा। यह स्पष्ट किया गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना करके संबंधित पुस्तकें और सामग्री खरीदना, नए प्रयोगशाला उपकरण और साहित्य खरीदना, बहु विषयक शिक्षा प्रणाली लागू करना, संगीत, खेल से संबंधित दो-तीन क्रेडिट पाठ्यक्रम संचालित करना, संगीत, खेल से संबंधित सामानों की खरीदारी करना, शिक्षा, गैर शिक्षक कर्मचारियों का प्रशिक्षण, वित्तीय साक्षरता से संबंधित पूरक पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए अमानत राशि का इस्तेमाल किया जाएगा।