मुंबई, सजे धजे बाजार और मिठाई की दुकानों पर रौनक दीवाली के त्योहार का खुद-ब-खुद अहसास करा रही है। इस पर्व पर जिले में टनों के हिसाब से मिठाई की खपत होने वाली है। दिवाली पर बधाई देने के चलन में मिठाई की खरीदारी भी शुरू हो गई है। अहम मुद्दा यह है कि जिले में दूध का उत्पादन उतना नहीं है जितनी मिठाई इस त्योहार पर खपनेवाली है। ऐसे में गुजरात जैसे राज्यों से मावा के नाम पर जहर तस्करी कर पालघर के रास्ते मुंबई भेजा जा रहा है। दापचरी चेक पोस्ट पर गुजरात से निजी बसों में आ रहा बड़े पैमाने पर मावा पकड़ा गया है। दिवाली में बढ़ी खपत को पूरा करने के लिए या तो इस मीठे जहर को पहले से स्टोर किया जाता या फिर सिंथेटिक मावा परोसा जाता।वहीं सालभर कुंभकर्णी नींद में सोया रहने वाला खाद्य एवं औषधि प्रशासन इन दिनों जाग गया है। जो मिठाइयों के सैंपल लेकर रिपोर्ट लैब में भेज रहा है। विडंबना यह है कि जब तक लैब की रिपोर्ट आएगी लोग बाजारों में उपलब्ध मीठे जहर को खाकर बीमार पड़ चुके होंगे।
भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत और कमीशनखोरी के कारण दिवाली पर आपको मीठा जहर बेचने की तैयारी हो रही है। लोगों तक शुद्ध मिठाई पहुंचे इसकी जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग पर है। जबकि हकीकत यह है कि पिछले एक सप्ताह में अभी तक नाम मात्र के ही सैंपल ही लिए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट भी अभी नहीं आई है और लोग रोजाना मिठाई खरीद रहे हैं। ऐसे में तय है जब तक महकमे की सैंपलिग की रिपोर्ट आएगी तब तक लोग इस मीठे जहर को हजम कर चुके होंगे। जबकि रिपोर्ट दीपावली से पहले आए तो लोगों को कम से कम यह पता रहे कि कौन सा हलवाई मिलावटखोर है और कहां शुद्ध मिठाई मिल रही है।





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