अंतरवाली: मराठा आरक्षण की मांग कर रहे मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई में आंदोलन करने का प्लान कैंसिल कर दिया है. वो बीच रास्ते अपने गांव लौट गए. उन्होंने सोमवार (26 फरवरी) को कहा कि फिलहाल कानून का सम्मान करेंगे. मराठा भी राज्य में शांति रखें, कोई कानून हाथ में न ले. बड़ी बातें-
- मनोज जरांगे ने सभी कार्यकर्ताओं को घर जाने को कहा. मनोज जरांगे अंतरवाली सरती गांव में भूख हड़ताल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि गांव जाकर मैं इलाज कराऊंगा और वहीं आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे.
- इससे पहले सोमवार की सुबह को मराठा प्रदर्शनकारियों ने अंबड तालुका में छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर एक राज्य परिवहन बस को आग लगा दी. इसका वीडियो वायरल हो रहा है.
- इसके बाद महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) ने पुलिस शिकायत दर्ज की है और अगली सूचना तक जालना में बस सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं.
- कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जालना जिले के अंबड तालुका में अगले आदेश तक कर्फ्यू लगा दिया गया है. जालना प्रशासन ने कहा कि भारी भीड़ के कारण धुले-मुंबई राजमार्ग और आसपास के अन्य इलाकों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है.
- संभाजीनगर, जालना और बीड जिला में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई है. कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने के बाद गृह विभाग ने यह फैसला लिया है. इंटरनेट सेवाएं 10 घंटे के लिए बंद रहेगी.
- इस बीच महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई. जहां विपक्षी दलों ने मराठा आरक्षण को लेकर प्रदर्शन किया.
- मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने कहा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस की बात नहीं सुननी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह बताना चाहिए कि कुनबी मराठों के ‘सगे संबंधियों’ पर अधिसूचना क्यों लागू नहीं की जा रही है.
- जरांगे ने रविवार देर रात यह टिप्पणी तब की जब मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि कार्यकर्ता को उनकी सरकार के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए. जरांगे ने रविवार को जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव में आरोप लगाया कि फडणवीस उनकी ‘‘हत्या करने’’ की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि उन्हें ‘सेलाइन’ के जरिए जहर देने की कोशिश की गई थी.
- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बयान के बारे में पूछे जाने पर जरांगे ने एबीपी माझा से कहा, “मैंने इन्हें सुना नहीं है, लेकिन उन्हें बताना चाहिए कि (मराठों के) रिश्तेदारों के आरक्षण की अधिसूचना क्यों लागू नहीं की गई. मैं उनका बहुत सम्मान करता था. उन्हें उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की बात नहीं सुननी चाहिए और उनकी (फडणवीस की) भाषा नहीं बोलनी चाहिए.”
- महाराष्ट्र विधानसभा ने मंगलवार (20 फरवरी) को सर्वसम्मति से एक अलग श्रेणी के तहत शिक्षा और सरकारी नौकरियों में मराठों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला बिल पारित किया था. वहीं जरांगे अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत मराठा के लिए आरक्षण की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं.





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