मुंबई: महाराष्ट्र में आगामी शैक्षणिक वर्ष से अंग्रेजी भाषा को ‘विदेशी भाषा’ की कैटेगरी में रखा जाएगा। ऐसे में अंग्रेजी 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि, स्टूडेंट्स के पास दो भाषाएं चुनने का विकल्प होगा। जिसमें एक भारतीय भाषा होगी और दूसरी भारतीय और विदेशी भाषाओं मे चुनी जाएगी। इसका दावा एजुकेशन टाइम्स की एक रिपोर्ट में किया गया है।
11वीं और 12वीं कक्षा के लिए नई विषय योजना के अनुसार छात्र आठ विषय चुन सकते हैं। जिसमें दो भाषाएं पर्यावरण और शारीरिक शिक्षा। जबकि अपनी पसंद के चार अन्य विषय छात्र चुन सकेंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम को खत्म किया जा सके।
एससीएफ के भाषा चार्ट के अनुसार छात्रों को कम से कम एक भारतीय भाषा का चयन करना होगा। चार्ट में 17 भारतीय भाषाएं और नौ विदेशी भाषाएं सूचीबद्ध हैं, जिनमें विदेशी विकल्पों में अंग्रेजी सबसे प्रमुख है।
ऐसे करना होगा भाषा का चुनाव
स्टूडेंट्स को दो भाषाओं में से एक को 17 भारतीय भाषाओं के ग्रुप में से चुनना होगा। जिनमें मराठी, संस्कृत, हिंदी, गुजराती, उर्दू, कन्नड़, तमिल, मलयालम, सिंधी, बंगाली, पंजाबी, पाली, तेलुगु, अर्धमागधी, महाराष्ट्री प्राकृत, अवेस्ता शामिल हैं।
वहीं पहलवी, अंग्रेजी को जर्मन, फ्रेंच, रूसी, जापानी, स्पेनिश, चीनी, फारसी और अरबी के साथ विदेशी भाषाओं की श्रेणी में शामिल किया गया है। जबकि दूसरी भाषा पहले या दूसरे ग्रुप से हो सकती है। ऐसे में अंग्रेजी अनिवार्य भाषा नहीं होगी।
हितधारक इस मुद्दे पर 3 जून तक दे सकते हैं सुझाव
आपको बता दें कि पहले कक्षा I से XII तक अंग्रेजी अनिवार्य थी। हालांकि, एससीईआरटी द्वारा जारी महाराष्ट्र में नए स्कूल शिक्षा ढांचे का मसौदा अब सभी हितधारकों के सुझावों के लिए खुला है। एससीईआरटी ने 3 जून तक हितधारकों से फीडबैक आमंत्रित किया है।





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