मुंबई : लोकसभा चुनाव में महायुति का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था. इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव में भी महायुति को कई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों पर इस समय सभी की निगाह टिकी हुई है. हालांकि एकनाथ शिंदें की सरकार के सामने विधानसभा चुनावों में भी कम चुनौती नहीं है. अगस्त महीने में हुए एम्पिरीकल और मास सर्वे के अनुसार, महाविकास आघाडी ने विदर्भ, पश्चिम महाराष्ट्र और मराठावाड़ा में अपनी पकड़ बना ली है.
महायुति का विदर्भ, पश्चिम महाराष्ट्र और मराठावाड़ा में कमजोर होना चिंता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि यहां पर विधानसभा की 170 सीटें हैं. सर्वे में अनुमान लगाया जा रहा है कि महायुति को 123 सीटें और महाविकास आघाडी को 152 सीटें मिल सकती हैं.
सर्वे में शामिल वरिष्ठ सेफोलॉजिस्ट दयानंद नेने ने दावा किया है कि पिछले 10 सालों में बीजेपी ने विदर्भ में अच्छा किया है, लेकिन इस बार यहां कांग्रेस की लहर दिख रही है. सोयाबीन और कपास की खेती करने वाले किसान सरकार से खफा हैं. उनका कहना है कि उन्हें समय से मुआवजा नहीं मिला है.
मराठावाडा में बीजेपी के लिए राह आसान नहीं है. मनोज जरांगे पाटिल ने बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. यहां पर विधानसभा की 46 सीटें हैं. ऐसे में अगर महायुति यहां पर मजबूती से चुनाव नहीं लड़ती है तो उनका सत्ता में वापस आना मुश्किल होगा.
बता दें कि बीजेपी को 2019 के चुनावों में मराठावाडा में 16 सीटें मिली थीं. जबकि बीजेपी ने 2019 में 15 सीट जीती थी. अगर पश्चिम महाराष्ट्र की बात करें तो बीजेपी पुणे में मजबूत है. हालांकि पार्टी बारामती, सतारा और सोलापुर में कमजोर हैं. ऐसे में बीजेपी के लिए ये भी एक बड़ी चुनौती है. अगर बीजेपी को फिर से सत्ता में वापसी करनी है तो उन्हें तीनों क्षेत्रों में बेहतर करना होगा.





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