मुंबई : डोंबिवली में हजारों परिवारों के सिर पर बेघर होने का खतरा मंडरा रहा है. डोंबिवली महानगर पालिका के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों का गुस्सा उनकी बेबसी को बयां कर रहा है. कारण है कोर्ट का आदेश, जिसके तहत इन परिवारों को अपने घर खाली करने होंगे और इमारतों को गिराने की कार्रवाई की जाएगी.
फर्जी सर्टिफिकेट से बनीं इमारतें- कोर्ट
यह विवाद उन 65 इमारतों से जुड़ा है जो फर्जी महा-रेरा सर्टिफिकेट के आधार पर खड़ी की गई थीं. इन इमारतों में करीब 6 हजार से ज्यादा परिवार रहते हैं, जो अब अपने घर से बेघर होने के डर में जी रहे हैं. हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि इन इमारतों को खाली करने के लिए निवासियों को 10 दिन का समय दिया जाए.
स्थानीय निवासियों की चिंता
निवासियों का आरोप है कि नगर पालिका और पुलिस द्वारा उन्हें जल्द से जल्द घर खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है. कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें धमकी दी जा रही है कि यदि वे घर खाली नहीं करते, तो जबरन कार्रवाई की जाएगी. अतिरिक्त आयुक्त योगेश गोडसे के अनुसार, इन अवैध इमारतों को लेकर स्थानीय निवासियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी. अब पुलिस की मदद से घर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. साथ ही, नगर पालिका द्वारा फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर इमारतों को अधिकृत दिखाने के मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है.
डोंबिवली के हजारों रहिवासियों पर आए इस संकट को लेकर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि अवैध इमारतों को बनवाने में शामिल दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने आश्वासन दिया कि इन घरों को क्लस्टर डेवलपमेंट योजना के तहत समाहित किया जाएगा, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके.





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