मुंबई : गर्मी के कारण झीलों में पानी लगातार घट रहा है, लेकिन इस संकट के बीच मनपा की लापरवाही से पानी की बर्बादी और बढ़ रही है। हाल ही में मुलुंड-पूर्व में ७५० मिमी व्यास की जलवाहिनी फटने के कारण टी-वॉर्ड के कई इलाकों में जलापूर्ति बाधित हो गई। पहले से ही पानी की कमी झेल रहे नागरिकों को अब टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वैसे यह कोई नई समस्या नहीं है। पिछले एक साल में मुंबई के कई इलाकों में इसी तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।
झीलों में गिरता जलस्तर
मुंबई को पानी तुलसी, विहार, तानसा, भातसा, मध्य वैतरणा, ऊपरी वैतरणा और मोदक सागर झीलों से मिलता है। हर साल गर्मी के दौरान इनमें पानी का स्तर घटता है, लेकिन २०२५ में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। मार्च आते-आते झीलों का जलस्तर पहले ही काफी गिर चुका है, जिससे आने वाले महीनों में पानी की कमी की आशंका बढ़ गई है। एक स्थानीय निवासी के अनुसार, हम झीलों में पानी की कमी से पहले ही परेशान हैं, ऊपर से पाइपलाइन फटने के कारण हजारों लीटर पानी रोज बर्बाद हो रहा है।
मनपा की नाकामी पर उठते सवाल
मनपा हर बार मरम्मत का दावा करके मामले को टाल देती है, लेकिन पुरानी पाइपलाइनों को बदलने और जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई की जल आपूर्ति व्यवस्था का इंप्रâास्ट्रक्चर पुराना हो चुका है, लेकिन मनपा इसे दुरुस्त करने की जगह फायर-फाइटिंग मोड में काम कर रही है।
मुंबई में पाइपलाइन फटने की घटनाएं
– दिसंबर २०२४: महिम में ५६ इंच की पाइपलाइन फटी, जिससे महिम, प्रभादेवी और लोअर परेल में जल संकट हुआ।
-दिसंबर २०२४: बांद्रा-पश्चिम में ६०० मिमी की पाइपलाइन लीक, जिससे बांद्रा और खार क्षेत्र प्रभावित हुए।
-अगस्त २०२४: पवई में १,८०० मिमी की तानसा (पश्चिम) जलवाहिनी फटी, जिससे १५-२० घरों को नुकसान हुआ और अंधेरी, जोगेश्वरी, बांद्रा-पूर्व, दादर, भांडुप, विक्रोली में जलापूर्ति ठप हो गई।





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