यवतमाल : बॉम्बे उच्च न्यायालय, नागपुर। न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और न्यायमूर्ति नंदेश देशपांडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यवतमाल में हुए अनिल थुल हत्याकांड के सभी आठ आरोपियों की आजीवन कारावास और अन्य सजाओं को बरकरार रखा। आरोपियों में रोहित विजय ओंकार, आदेश उर्फ आद्या अनिल खैरकर, सुहास अनिल खैरकर, अश्विन उर्फ गोंड्या दीपक तेलंग, रोशन उर्फ कंडी पुरुषोत्तम प्रधान, अनूप उर्फ दादू अनिल रामटेके, सचिन उर्फ बंट्या अशोक भोयर और वैभव कृष्ण नाइक शामिल हैं। इनमें से वैभव नाइक की मृत्यु हो चुकी है।
31 अक्टूबर, 2017 को रात लगभग 9 बजे अनिल थुल और उसका दोस्त प्रेमराज शेंडे एक दुकान के सामने बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान, आरोपी घातक हथियारों के साथ वहाँ पहुँचे और थुल और शेंडे पर हमला कर दिया। उन्होंने थुल को मौके पर ही मार डाला, जबकि शेंडे बाल-बाल बच गया। 12 अप्रैल, 2019 को सत्र न्यायालय ने अभियुक्त को हत्या के अपराध में आजीवन कारावास और अधिकतम 10,000 रुपये के जुर्माने, और हत्या के प्रयास व कुछ अन्य अपराधों में विभिन्न अवधियों और जुर्माने की सजा सुनाई थी। अभियुक्त ने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इस पर सुनवाई के बाद, उच्च न्यायालय ने हत्या की साजिश को छोड़कर अन्य सभी अपराधों में दोषसिद्धि को बरकरार रखा और अभियुक्तों को बरी कर दिया। हत्या की साजिश की सजा रद्द सत्र न्यायालय ने अभियुक्त को हत्या की साजिश के अपराध में आजीवन कारावास और 5,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। उच्च न्यायालय अपराध साबित नहीं कर सका। इसलिए, अभियुक्तों को अपराध से बरी कर दिया गया और सजा रद्द कर दी गई।





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