दिल्लीः दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके में 4 अक्टूबर को हुई नौकरानी की मौत का मामला अभी तक चर्चा का विषय बना हुआ है. एक कोठी में नौकरानी की लाश कमरे में फंदे से लटकती मिली थी. नौकरानी के परिजन उसे हत्या बता रहे हैं तो पुलिस इसे खुदकुशी करार दे रही है.
16 अक्टूबर को मॉडल टाउन की उस कोठी के बाहर अचानक से लोगों की भीड़ जमा हो गई और लोग हंगामा करने लगे. कुछ लोगों ने पत्थर भी चलाए. लोगों का कहना था कि 4 अक्टूबर के दिन इस घर में 16 से 17 साल की नौकरानी की हत्या की गई और शव को फंदे पर लटका दिया गया. इस घर में एक 74 साल की बुजुर्ग महिला रहती है. उन्होंने ही 24 घंटे के लिए घर में 25 सितंबर को ही नौकरानी को रखा था. जानकारी के मुताबिक घर में एक ड्राइवर भी रहता है. परिजनों का आरोप है कि जिस दिन से हादसा हुआ है, उस दिन से ही पुलिस उन्हें टरका रही है. कोई जानकारी नहीं दे रही है. इसके बाद 16 अक्टूबर के दिन जमकर हंगामा हुआ. कोठी पर हुए हंगामे को काबू करने में पुलिस को काफी मुश्किल भी हुई थी.
लड़की के परिजन आरोप लगा रहे है कि लड़की के साथ बलात्कार हुआ, फिर हत्या कर दी गई और मामले की दबाने के लिए उसे फंदे पर लटका कर खुदकुशी का रूप दिया गया है. मॉडल टाउन थाने पर भी प्रदर्शनकारी पहुंच गए थे, जिन्हें पुलिस ने जबरन हटाया था. उसी में एक पत्रकार ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया और पुलिस कमिश्नर को शिकायत का पत्र भी लिखा. पुलिस इन आरोपों को सिरे से नकार रही है. पुलिस का कहना है कि कोठी में एक 74 साल की बुजुर्ग महिला रहती है. 4 अक्टूबर को जब उनकी नौकरानी दरवाजा नहीं खोल रही थी तो पुलिस को कॉल किया, फिर मौके पर फायर विभाग की गाड़ी आई, फिर दरवाजा तोड़ कर देखा तो लड़की ग्रिल के जरिये फंदा लगाकर झूल गई थी.
इसके बाद पुलिस ने 8 तारीख को डॉक्टरों के पैनल से सफदरजंग हॉस्पिटल में पोस्टमार्टम कराया जहां न तो किसी चोट के निशान मिले और नही किसी तरह के कोई दूसरे सबूत मिले हैं. शुरुआती जांच में खुदकुशी के सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उसी हिसाब से केस की जांच की. पुलिस का कहना है कि इसके बाद शव को घरवालों को दे दिया गया और फिर 8 को ही घरवालों ने वजीरपुर में अंतिम संस्कार कर दिया था.
पुलिस का कहना है कि 16 अक्टूबर को ही कुछ लोग थाने के बाहर बैठ कर प्रदर्शन कर रहे थे, और केस को नया रंग देने की कोशिश कर रहे थे. उन्हें वारदात की जानकारी दी गई लेकिन वो नहीं माने. इस दौरान उन्हें बताया गया कि कोरोना की वजह से वो लोग इस तरह से प्रदर्शन नहीं कर सकते और यह DDMA एक्ट के खिलाफ है. फिर भी वो नहीं माने तो पुलिस ने पहले उन्हें हिरासत में लिया, फिर थोड़ी देर बाद जाने दिया. उन महामारी एक्ट में केस भी दर्ज कर लिया. हालांकि पुलिस किसी पत्रकार के साथ मारपीट की बात से भी इनकार कर रही है.





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