मुंबई : आगामी मुंबई नगर निगम चुनावों को लेकर शिवसेना की वरिष्ठ नेता नीलम लतिका दीवाकर गोरे ने बीजेपी पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पार्टी की उच्च कमान और देवेंद्र फडणवीस के समन्वय से महायुति में आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया था, लेकिन सीट वितरण प्रक्रिया में शिवसेना को अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा। नीलम गोरे ने बताया कि शिवसेना ने कुल 165 सीटों में से केवल 25 सीटों के लिए मांग की थी। बावजूद इसके, उन्हें केवल 15 सीटें ही ऑफर की गईं, जिनमें से 7 सीटें तो ऐसी थीं, जिनका शिवसेना ने कभी अनुरोध नहीं किया था। उन्होंने कहा कि यह स्थिति न केवल अपमानजनक है, बल्कि शिवसेना के उन प्रतिष्ठित कार्यकर्ताओं के लिए भी बेहद ठेस पहुंचाने वाली है, जिन्हें उनके क्षेत्र में अवसर नहीं मिला।
गोरे ने आगे बताया कि सीटों की प्राथमिकता सूची बीजेपी के स्थानीय इकाई और पार्टी उच्च कमान को भेजी गई थी। इसके बाद राज्य और केंद्र स्तर पर दोनों पार्टियों के बीच कई बार चर्चा हुई, लेकिन स्थानीय बीजेपी इकाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि शिवसेना को किसी भी सीट की पेशकश नहीं की जाएगी। नीलम गोरे ने कहा, “हालांकि हमें विधानसभा में एक भी सीट नहीं मिली, लेकिन हमने बड़ी मेहनत और प्रयास किए। महिला मतदाताओं के महत्वपूर्ण हिस्से का झुकाव अब शिवसेना की ओर हो रहा है। इस दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, हम अपना चुनाव अभियान प्रभावशाली तरीके से आगे बढ़ाएंगे।
शिवसेना नेताओं का मानना है कि बीएमसी चुनाव में महिलाओं की भागीदारी और उनके मतों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसलिए पार्टी महिला मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पैठ मजबूत करने की रणनीति पर जोर दे रही है। गोरे ने यह भी कहा कि महिला मतदाता अब शिवसेना के एजेंडा, कार्यक्रम और स्थानीय मुद्दों के प्रति अधिक सजग और सक्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार की बीएमसी चुनाव लड़ाई महायुति और विपक्षी गठबंधन के बीच बेहद निर्णायक होगी। महायुति के भीतर सीटों का असंतुलन और विवाद शिवसेना के अंदर रणनीतिक चुनौतियां पैदा कर सकता है। ऐसे में पार्टी का ध्यान कार्यकर्ताओं और महिला मतदाताओं के समर्थन को मजबूत करने पर है।
नीलम गोरे ने बीजेपी पर यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने शिवसेना की प्राथमिकता और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के योगदान को नजरअंदाज किया। उन्होंने कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं ने पिछले वर्षों में इलाके के विकास, सामाजिक और जनसंपर्क के लिए कठिन मेहनत की है। उनके लिए यह निर्णय बहुत अपमानजनक और हतोत्साहित करने वाला है। गोरे ने आश्वासन दिया कि इस असहमति के बावजूद शिवसेना अपना अभियान स्थानीय मुद्दों, विकास योजनाओं और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित रखेगी। उनका कहना था कि पार्टी महिला मतदाताओं की आवाज को प्रमुखता देगी और उन्हें हर मंच पर सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला मतदाता अब चुनावी समीकरण में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, और शिवसेना इसका लाभ उठाने के लिए रणनीतिक प्रयास कर रही है। बीएमसी चुनाव के नतीजे मुंबई में राजनीतिक संतुलन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। नीलम गोरे का यह बयान महायुति में सीटों के विवाद और आगामी चुनाव में पार्टी की रणनीति की दिशा दोनों को स्पष्ट करता है। पार्टी की कोशिश होगी कि महिला मतदाता और पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका को मजबूती से सामने लाया जाए।





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