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कांदिवली स्थित शताब्दी अस्पताल में पैरामेडिकल काउंसिल की अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था के खिलाफ बगावत

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मुंबई : मनपा अस्पताल में कानून और नियम बेबस होता दिखाई दे रहा है। कांदिवली स्थित शताब्दी अस्पताल में पैरामेडिकल काउंसिल की अनिवार्य पंजीकरण व्यवस्था के खिलाफ खुली बगावत छिड़ गई है। आलम यह है कि स्पष्ट सरकारी निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए १२ लैब टेक्नीशियन रजिस्ट्रेशन से इनकार कर डटे हुए हैं। ऐसे में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं और सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब योग्यता और पंजीकरण ही अधूरे हैं तो मरीजों की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है।
कांदिवली स्थित शताब्दी अस्पताल में कानून और आदेशों की खुलेआम अवहेलना सामने आई है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और प्रयोगशाला तकनीशियनों के बीच पैरामेडिकल काउंसिल पंजीकरण को लेकर तीखा टकराव चल रहा है। स्पष्ट सरकारी निर्देशों के बावजूद १० से १२ पुराने स्थाई लैब तकनीशियन रजिस्ट्रेशन कराने से इनकार कर अड़े हुए हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन की साख और मरीजों की सुरक्षा दोनों सवालों के घेरे में आ गई हैं। यह पूरा मामला तब सामने आया जब एड. तुषार भोसले ने आपले सरकार पोर्टल के माध्यम से महाराष्ट्र पैरामेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद काउंसिल ने शताब्दी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके तहत सभी लैब तकनीशियनों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया। हालांकि, निर्देश जारी होने के बावजूद कम से कम १०-१२ तकनीशियन खुले तौर पर इसका विरोध कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन तकनीशियनों ने लिखित आपत्ति पत्र भी दिए हैं, लेकिन उनकी प्रतियां अब तक सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
फिर कटघरे में संदिग्ध भर्तियां

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब वर्ष २००८ की नियुक्तियों की फाइलें फिर खुलीं। रुचिरा वाघ और श्रद्धा दरेकर नामक दो तकनीशियनों को ब्लड बैंक में नियुक्त किया गया था, जबकि वहां सरकारी डीएमएलटी योग्यता अनिवार्य थी। योग्यता न होने के बावजूद नियुक्ति हुई और बाद में एफडीए की आपत्ति के बाद दोनों को चुपचाप ब्लड बैंक से हटाकर लैब में शिफ्ट कर दिया गया। आज वही योग्यता की कमी उनके पंजीकरण में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। नियमों के अनुसार, बिना सरकारी डीएमएलटी के पैरामेडिकल काउंसिल में पंजीकरण संभव नहीं है। यही स्थिति लगभग १० अन्य तकनीशियनों की भी बताई जा रही है।