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घनी आबादी वाला मुंबई और दुर्गम जंगलों वाला गढ़चिरौली जिला मलेरिया के सबसे बड़े हॉटस्पॉट

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मुंबई: महाराष्ट्र में मलेरिया का खतरा अब डबल अटैक के रूप में सामने आ रहा है। घनी आबादी वाला मुंबई और दुर्गम जंगलों वाला गढ़चिरौली जिला राज्य के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बनकर उभरे हैं, जहां हर साल मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष २०२५ में राज्य भर में २२ हजार से ज्यादा मलेरिया के मामले दर्ज हुए और २७ लोगों की मौत हुई। बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने स्थिति पर काबू पाने के लिए छह जिलों में विशेष निगरानी और नियंत्रण अभियान तेज कर दिया है, ताकि बीमारी के पैâलाव को रोका जा सके।
राष्ट्रीय मच्छरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत मलेरिया, फाइलेरिया और जलजनित रोग विभाग के आंकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। मलेरिया एक मच्छरजनित बीमारी है, जो मादा एनोफिलीस मच्छर के काटने से पैâलती है। इसके कारण ठंड के साथ बुखार आना, सिरदर्द, उल्टी या मितली, बदन दर्द, ज्यादा पसीना आना और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। फिलहाल, गढ़चिरौली और मुंबई में मलेरिया का प्रकोप अधिक है। इन दोनों अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में मलेरिया पर नियंत्रण करना कीट जनित रोग नियंत्रण विभाग के लिए हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है, इसलिए इसके लिए विभिन्न उपाय योजनाएं लागू की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ और ओडिशा सीमा के पास के क्षेत्र तथा आदिवासी समुदायों में होने वाला पलायन मरीजों की संख्या बढ़ने का कारण बताया जा रहा है। मुंबई में घनी आबादी के कारण संक्रमण तेजी से पैâलता है और आने-जाने वाली प्रवासी आबादी के कारण मलेरिया उन्मूलन में चुनौती पैदा होती है, ऐसा अधिकारियों का कहना है।
छह जिलों पर विशेष ध्यान
सितंबर २०२५ में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने संक्रामक रोग नियंत्रण के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित की। इसके माध्यम से गढ़चिरौली सहित राज्य के छह जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। ४०० से अधिक चिकित्सा अधिकारियों, बालरोग विशेषज्ञों, १८० लैब निरीक्षकों और १६५ कीट विशेषज्ञों को रोग निदान और मच्छर-नियंत्रण उपायों को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।