मुंबई : आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी करने का अधिकार देने के केंद्र के फैसले के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की अगुवाई में शुक्रवार को देश भर में चिकित्सकों ने हड़ताल करने का फैसला लिया है, जिसके चलते महाराष्ट्र के करीब 1.50 लाख डॉक्टर्स, मेडिकल स्टूडेंट्स सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कोई काम नहीं करेंगे। हालांकि इस दौरान कोरोना संक्रमण से जुड़ी चिकित्सीय सेवाएं एवं इमरजेंसी सेवाएं जारी रहेंगी। आईएमए महाराष्ट्र के प्रेसिडेंट अविनाश भोंडवे ने बताया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की घोषणा के तहत आयुर्वेद चिकित्सकों को सर्जरी के कानूनी अभ्यास की अनुमति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
डॉ. भोंडवे ने स्पष्ट किया कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का विरोध आयुर्वेद का विरोध नहीं, बल्कि उस मिक्सोपैथ का विरोध है, जिसके तहत सरकार आयुर्वेद और एलोपैथ को मिक्स करना चाह रही है। हम चाहते हैं की यह अधिसूचना को वापस लिया जाये और इसके लिए एक समिति गठन किया जाये। डा. भोंडवे ने कहा कि वन सिस्टम पालिसी आधुनिक चिकित्सा सिस्टम को पूरी तरह खत्म कर देगी। मॉडर्न मेडिसिन के डॉक्टर्स आयुर्वेद के डॉक्टर्स को सर्जरी करने की इजाजत मिलने से नाराज हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि आज की हड़ताल के दौरान नॉन-इमर्जेंसी और नॉन-कोविड मेडिकल सर्विसिज को पूरी तरह से बंद रहेंगे। आईसीयू, सीसीयू चलेंगे और इमर्जेंसी सर्विसेज भी चलेंगी, लेकिन इलेक्टिव सर्जरी नहीं होगी। इमर्जेंसी मेडिकल सर्विसेज, आईसीयू, कोविड केयर, सीसीयू, इमर्जेंसी सर्जरी और लेबर रूम खुले रहेंगे।
एसोसिएशन ऑफ मेडिकल कन्सल्टेंट अर्थात AMC ने भी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा आहूत हड़ताल का समर्थन किया है। एएमसी-मुंबई के प्रेसीडेंट डॉ. दीपक बेद ने बताया कि आयुर्वेद चिकित्सकों को आधुनिक शल्य चिकित्सा के तरीके से जोड़ना कहीं से भी सही निर्णय नहीं है और इस तथ्य को सरकार को समझना ही होगा। आयुर्वेद का महत्व अपनी जगह है और एलोपैथ के डॉक्टर्स का महत्व अपनी जगह। दोनों को आपस में मिक्स करना उचित नहीं है।
भारत सरकार ने चिकित्सा के क्षेत्र में आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए आयुर्वेद के पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टरों को 58 तरह की सर्जरी की इजाजत दी है, जिससे देश भर के आयुर्वेदिक पोस्ट ग्रेजुएट डॉक्टर भी एलोपैथिक डॉक्टरों की तरह ऑपरेशन कर सकेंगे। इन 58 तरह की सर्जरी में हड्डी रोग, आंखों की सर्जरी, कान-गला और दांत की सर्जरी, स्किन ग्राफ्टिंग, ट्यूमर की सर्जरी, हाइड्रोसील, अल्सर, पेट की सर्जरी शामिल हैं। जहां एक ओर भारत सरकार के इस अनुमति को आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के इतिहास में मील के पत्थर की तरह देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर एलोपैथिक डॉक्टरों की संस्था ने आयुर्वेदिक डॉक्टरों को मिली सर्जरी की अनुमति का विरोध भी किया है और कहा है कि चिकित्सा पद्यतियों के बीच में एक लक्ष्मण रेखा होनी चाहिये।





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