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मुंबई जाने को निकले युवक की कार खाई में मिली, चालक की जगह मिला पुतला

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मुंबई : मुंबई निवासी युवक के कार सवार भाई के लापता होने की सूचना देने पर पुलिस उसकी तलाश में निकली तो हरदोई शाहजहांपुर मार्ग पर शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र में शनिवार देर रात कार सड़क किनारे खंती में पलटी मिली।
कार का कुछ हिस्सा जला था और इसमें पुतला रखा था। फील्ड यूनिट टीम ने मौके से नमूने जुटाए हैं। पुलिस केस को क्लेम और घपले से जोड़कर जांच कर रही है।
सीओ सिटी विकास जायसवाल को मुंबई निवासी दयानंद पांडेय ने कॉल की। उसने भाई सच्चिदानंद पांडेय उर्फ सचिन के लापता होने की जानकारी देकर लास्ट लोकेशन हरदोई शाहजहांपुर मार्ग पर मिलन ढाबा बताई। इस पर सीओ ने शाहाबाद कोतवाल का नंबर दे दिया।
शाहाबाद कोतवाल ने मामले की जांच की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। देर रात दयानंद ने फिर कोतवाल को कॉल की तो उन्होंने चेकिंग शुरू की। हरदोई- शाहाबाद के बीच मीरपुर गन्नू के आगे सड़क के नीचे खाई में एक कार पलटी मिली। उसमें चालक की जगह पुतला था।
कार में आईडी कार्ड, एटीएम कार्ड, पर्स और साठ रुपये और दो जोड़ी कपड़े बरामद हुए हैं। कोतवाल का कहना है कि कार को जानबूझकर पलटाकर आग लगाई गई थी। एएसपी पश्चिमी कपिल देव सिंह भी मौके पर पहुंचे। सीओ राकेश वशिष्ठ ने भी पड़ताल की।
कोतवाल शिवशंकर सिंह ने बताया कि किसी के खुद को मृत साबित करने की योजना के तहत घटना को अंजाम देने की आशंका। कार सच्चिदानंद पांडेय की है। वह मूल रूप से आजमगढ़ जनपद के अतरौलिया थाना क्षेत्र के ग्राम शेखपुर का निवासी है। नवी मुंबई में कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्य करता है।
इस कंपनी की ब्रांच दिल्ली में भी है। पूरे मामले की जानकारी पर सचिन का भाई मायानंद आजमगढ़ से शाहाबाद पहुंच गया है, लेकिन इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पा रहा है।
पुलिस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि कार चालक खुद को मृत घोषित करना चाहता था। इसकी दो वजहें हो सकती हैं। या तो वह बीमा की बड़ी रकम का क्लेम पाना चाहता था, या फिर किसी गोलमाल में शामिल था और अपनी मौत दर्शाकर पीछा छुड़ाना चाह रहा था।
साथ ही साथ ये भी आशंका पुलिस को है कि संबंधित व्यक्ति पर बहुत अधिक कर्ज हो गया होगा और इससे छुटकारा पाने को उसने साजिश रची। कार में आग लगाने के बाद इसके शीशे बंद कर खाई में पलटा दी गई। शीशे बंद होने के कारण कार में आक्सीजन नहीं पहुंची और इसी वजह से आग बुझ गई।
कुछ कागज और कपड़े जिनमें आग लगाई गई थी, वह भी पूरी तरह से नहीं जल पाए। पुतले को कंबल ओढ़ाया गया था। तकिये से धड़ बनाया गया था और नीचे सिर्फ मोजे रख दिए गए थे।