मुंबई : कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के बीच विपक्ष के एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। शिवसेना जहां एक तरफ एनसीपी प्रमुख शरद पवार को यूपीए अध्यक्ष बनाने की वकालत कर रही है। वहीं, एनसीपी को लेकर कांग्रेस नरम रुख अपना रही है। क्योंकि, पार्टी खुद संकट से जूझ रही है। शिवसेना का बार-बार कांग्रेस पर निशाना साधना भी इसी रणनीति का हिस्सा है कि शिवसेना महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।
महाराष्ट्र कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शिवसेना का बार-बार शरद पवार को यूपीए का अध्यक्ष बनाने की वकालत करना सरकार में अपनी जगह को और मजबूत करने की कोशिश है। शिवसेना जानती है कि एनसीपी उसके साथ है, तो कांग्रेस भी गठबंधन में शामिल रहेगी। साथ ही इससे विकास अघाड़ी गठबंधन में शिवसेना अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। विकास अघाड़ी गठबंधन में कांग्रेस सबसे कमजोर स्थिति में है।
पार्टी के शिवसेना के साथ रिश्ते बेहद तल्ख रहे हैं। पर भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस गठबंधन को बरकरार रखना चाहती है। शिवसेना और एनसीपी भी कांग्रेस की इस मज़बूरी को समझ रहे हैं। इसलिए दोनों दल कांग्रेस पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं, ताकि मुंबई महानगरपालिका चुनाव में ज़्यादा सीट मांगने के बजाए कम सीट पर मान जाए।
शिवसेना और एनसीपी के इस रुख को देखते हुए कांग्रेस के अंदर मुंबई महानगरपालिका चुनाव का लेकर अलग अलग राय है। पार्टी का एक बड़ा तबका अकेले लड़ने को वकालत कर रहा है। उनके मुताबिक पार्टी शिवसेना और एनसीपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है, तो ज़मीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ता दूसरी पार्टियों में चला जाएगा। इसका पार्टी संगठन को नुकसान होगा।





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