मुंबई। शिर्डी में काकडी गांव में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्षी नेताओं की खबर ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में उन्होंने कहा कि पीएम के महाराष्ट्र दौरे से कई लोगों के पेट में दर्द हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जिस परियोजना का उद्घाटन करते हैं, वह परियोजना हवा की गति से पूरी होती है। उनके हाथ में सफलता का पारस है, जिसे हाथ लगा देते हैं, वह सोना बन जाता है, इसलिए हम उन्हें समय-समय पर महाराष्ट्र में भूमिपूजन के लिए बुलाते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी के महाराष्ट्र दौरे की वजह से कई लोगों के पेट में दर्द हो रहा है, लेकिन हमें उनकी तरफ देखना नहीं है। ऐसे पेट दर्द से पीड़ित लोगों के लिए हमने बाला साहेब ठाकरे आपला दवाखाना शुरू किया है। वहां मुफ्त में इलाज किया जाता है। शिंदे ने कहा कि राज्य में हमारी सरकार आने के पहले ढाई साल तक महाराष्ट्र में विकास के काम बंद थे, लेकिन हमारी सरकार आने के बाद विकास कार्यों को गति दी गई और कई नई परियोजनाएं शुरू की गई। राज्य का विकास करने के लिए डबल इंजन की सरकार जरूरी है। राज्य के विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी से जिस बात की मांग की गई, उसे उन्होंने पूरा किया।
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र का 50 फीसदी हिस्सा सूखा प्रभावित है। जहां-जहां बारिश कम होती है, वहां पानी की समस्या पैदा हो जाती है। ऐसे में जब तक वहां पानी उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक महाराष्ट्र से किसान आत्महत्या का कलंक समाप्त नहीं हो पाएगा। फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह काम पूरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी वाहिनी की नदियों से जो पानी समुद्र में बह जाता है, उसे गोदावरी नदी में लाकर अहमदनगर, नाशिक सहित संपूर्ण मराठवाडा का सुजलाम-सुफलाम किया जा सकता है। इसके लिए हमने लिए पूरा सिस्टम, पूरा ढांचा तैयार कर लिया है। हम विदर्भ में वैनगंगा नदी के बर्बाद हो रहे पानी को विदर्भ के सूखाग्रस्त इलाकों में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। हम विदर्भ, मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र के तीनों हिस्सों को स्थायी रूप से सूखा मुक्त बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद की जरूरत है। फडणवीस ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तरी महाराष्ट्र में अगली पीढ़ी को सूखा नहीं देखना पड़ेगा।





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