मुंबई : राज्य सरकार की प्रमुख बिजली प्रदाता कंपनी महावितरण का बिल बकाया ६३ हजार, ७४० करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। राजस्व घाटे के कारण सकते में आए महावितरण ने बिजली बिल वसूली अभियान चलाने का निर्णय लिया है। महावितरण ने अपने सभी विभागीय कार्यालयों को निर्देश दिया है कि यदि बकाएदार बिल नहीं भरते तो उनके बिजली कनेक्शन काट दिए जाएं।
बकाएदारों में ग्रामीण अंचलों के ग्राहकों का भी समावेश है। बकाए की राशि में ब्याज व विलंब शुल्क की राशि भी शामिल है। बिल वसूली की कई योजनाओं पर अमल किया गया लेकिन कंपनी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। बिल वसूली के लिए ग्राहकों को सुलभ किस्त में राशि भुगतान की सहूलियत दी गई है। विलंब शुल्क भी माफ करने का निर्णय लिया गया है लेकिन ग्राहक बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं, इससे महावितरण की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। बिजली खरीदी, कर्मचारियों का वेतन और रोजाना खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है। महावितरण ने ग्राहकों से बिल का भुगतान करने की अपील की है। बावजूद इसके यदि बिल नहीं भरते तो उन ग्राहकों की बिजली आपूर्ति काट दी जाएगी। बीते साल दिसंबर आखिर तक कृषि पंप ग्राहकों का ४५ हजार, ४९८ करोड़ रुपए, घरेलू, वाणिज्य, औद्योगिक ग्राहकों का ८,४७५ करोड़ रुपए और उच्च दाब ग्राहकों पर २,४३५ करोड़ रुपए बिल बकाया है।
बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बिजली कंपनियों से बिजली खरीदी जाती है, जिसके लिए राशि का भुगतान करना अनिवार्य होता है लेकिन ग्राहकों पर इतना बड़ा बिल बकाया होने से कंपनी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। लिहाजा कंपनी ने अपने विभागीय कार्यालयों को बिल वसूली का निर्देश दिया है। अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वाह न करनेवाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।





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