मुंबई। कोरोना पीड़ितों के लिए जरूरी माने जा रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की वितरण प्रणाली पर सवाल उठाते हुए बांबे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को फटकार लगाई है। पिछले कुछ दिनों से रेमडेसिविर की कमी को लेकर महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों में आरोप-प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैं। सोमवार को इस मामले में स्वयं दखल देते हुए बांबे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि देश के 40 फीसद कोरोना मामले महाराष्ट्र में होने के बावजूद उसे रेमडेसिविर की पर्याप्त खेप क्यों नहीं मिल रही है? उच्च न्यायालय ने इस संदर्भ में महाराष्ट्र सरकार को भी फटकार लगाते हुए पूछा है कि 13 और 18 अप्रैल को रेमडेसिविर की एक भी खेप नागपुर को क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई?
न्यायालय के अनुसार, अधिकारियों से बातचीत में उसे पता चला है कि राज्य स्तर पर एक समिति बनाई गई है, जो जरूरत के मुताबिक विभिन्न स्थानों पर रेमडेसिविर भिजवाने का फैसला करती है। इस समिति की सिफारिश पर ही राज्य सरकार रेमडेसिविर बनाने वाली सात कंपनियों को दवा की आपूíत के निर्देश देती है। महाराष्ट्र में आजकल प्रति घंटे 2,859 नए मामले आ रहे हैं और हर तीन मिनट पर कोरोना से एक मौत हो रही है। ऐसे में सरकार को सभी जरूरतमंद शहरों में रेमडेसिविर भिजवाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
इधर, देश में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित महाराष्ट्र में अब इस बीमारी से जुड़ी दवाओं पर भी जबर्दस्त राजनीति हो रही है। बड़ी मात्रा में रेमडेसिविर इंजेक्शन विदेश भेजने की आशंका पर पुलिस ने एक दवा कंपनी के डायरेक्टर को थाने बुलाकर शनिवार को पूछताछ की। इस डायरेक्टर की पैरवी में थाने पर भाजपा नेताओं देवेंद्र फड़नवीस और प्रवीण दारेकर के पहुंचने पर मामला तूल पकड़ गया। सरकार में शामिल दलों ने जहां भाजपा नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाए वहीं भाजपा ने महाराष्ट्र सरकार पर संकट काल में भी राजनीति करने का आरोप लगाया।
पुलिस ने बताया कि हमें जानकारी मिली थी कि निर्यात पर पाबंदी के बावजूद रेमडेसेविर के करीब 60 हजार वायल (शीशी) एयर कार्गो से विदेश भेजे जाने वाले हैं। इस जानकारी पर हमने दमन स्थित कंपनी ब्रुक फार्मा के डायरेक्टर राजेश दोकानिया को कांदिवली में उनके घर से रात साढ़े आठ बजे बीकेसी थाने बुलाकर पूछताछ शुरू की। दोकानिया को करीब 12 बजे छोड़ दिया गया। पुलिस ने बताया कि राजेश दोकानिया के पास रेमडेसिविर की 60 हजार वायल का स्टाक था। दवा की किल्लत देखते हुए सरकार ने उसे यह स्टाक देश में ही बेचने को कहा था। महाराष्ट्र पुलिस के डीसीपी मंजूनाथ सिंह ने बताया कि हम दोकानिया से उस स्टाक के बारे में जानना चाहते थे।





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