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रेलवे के ब्रिजों का होगा कायाकल्प

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मुंबई, अंधेरी के गोखले ब्रिज की घटना के बाद आईआईटी मुंबई और मनपा ने मिलकर जो सर्वे किए थे, वहां सबसे ज्यादा पुराने स्टील के गर्डर सड़ने की बात सामने आई थी। ट्रैक के ऊपर बने इस तरह के पुलों से अब स्टील के गर्डर हटाए जाएंगे और उसकी जगह रेलवे इन्हें सीमेंट के गर्डर में बदलने की तैयारी कर रही है, ताकि रेलवे के ब्रिज पहले की अपेक्षा अधिक शक्तिशाली हों।
चर्चगेट से विरार के बीच सात पुलों के गर्डर बदलने की तैयारी चल रही है। रेलवे इसके लिए टेंडर निकाल रही है। इन सात ब्रिजों के कुल ५३ स्पेन यानी गर्डर को बदला जाएगा। ये सभी स्टील के गर्डर हैं, जिन पर जंग लगने की ज्यादा संभावना है। इन्हें पीएससी गर्डर से रिप्लेस किया जाएगा, जो विशेषकर सीमेंट से बने होते हैं। ब्रिज की मजबूती और रेलवे की सुरक्षा के हिसाब से ये बहुत ही बढ़िया कदम है। इससे ट्रेनों के परिचालन में भी सुधार होगा क्योंकि प्रभावित ब्रिज के नीचे से गुजरने पर ट्रेनों की गति सीमित करनी पड़ती है।
पश्चिम रेलवे ने जिन सात ब्रिजों को चिह्नित किया, उनमें से चार ब्रिज पर ४० स्पेन बदले जाएंगे। स्पेन का मतलब है ब्रिज का एक लंबा हिस्सा और इन ४० स्पेन में प्रत्येक की लंबाई ९.१५ मीटर है। तीन ब्रिज के १३ स्पेन की लंबाई ९.१५ से १२.२० मीटर की है। यहां लंबाई के बारे में बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि इतने लंबे हिस्सों को बदलना आसान नहीं होता है और इसे बदलने के लिए रेलवे को ब्लॉक लेने पड़ेंगे। इस काम के दौरान कई बार ट्रेनों का परिचालन प्रभावित होने वाला है।