मुंबईः भाजपा अध्यक्ष व विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने आज विधायकों के एक दल के साथ आवास और शहरी मामलों के केंन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मुलाक़ात कर उन्हें बताया कि मुंबई में शिवसेना किस तरह किराएदारों और ज़मीन मालिकों को भड़का रही है. और इसके लिए मंत्रालय की ओर से जल्द से जल्द एक स्पष्टीकरण की ज़रूरत है. इस दल में मुंबई से विधायक कैप्टन तमिल सेलवन, श्राहुल नार्वेकर के अलावा मुंबई भाजपा उपाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी भी मौजूद थे.
केंद्रीय आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय ने “द मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021” लागू किया है. अभी किसी भी राज्य ने इसे लागू नहीं किया है. अब राज्यों को इसे लागू करना है. लेकिन महाराष्ट्र में शिवसेना ने इसे लेकर हंगामा शुरू कर दिया है. शिवसेना का आरोप है कि इस नए किराया एक्ट से मुंबई जैसे महानगरों के लाखों किराएदारों को नुक़सान होगा और उन्हें बढ़ा हुआ किराया देना पड़ेगा.
शिवसेना का आरोप है कि नए किराएदारों को भी पूरी तरह बाज़ार भरोसे छोड़ दिया गया है. इसमें किराएदारों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं दिखाई गई है. शिवसेना का कहना है कि अब तक चला आ रहा किराया क़ानून ही ठीक है.
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष और विधायक मंगलप्रभात लोढ़ा ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि इस अधिनियम को लेकर विपक्षी दल मुंबई में लोगों के बीच कई तरह की अफ़वाहें फैला रहे हैं, जिनको जल्द से जल्द दूर करना आवश्यक है. इस नये अधिनियम से जमीन के मालिक तथा किरायेदारों के बीच बेहतर तालमेल की कमी देखी जा रही है. इसी का लाभ उठाते हुए शिवसेना भ्रम की स्थिति फैला रही है. मुंबई बीजेपी अध्यक्ष ने बताया कि बीजेपी विधायकों के दल ने हरदीप सिंह पुरी से मुलाक़ात करके मुंबई की मौजूदा अचल संम्पति दर, व्यवसायिक व अवासीय स्थिति, किराया व पगड़ी प्रणाली आदि पर विस्तार से चर्चा की और विपक्षी दल जिन बिंदुओं से भ्रम की स्थिति बना रहे हैं उनसे मंत्रालय को अवगत कराया.
प्रस्तावित अधिनियम की धारा 4 (1) और अन्य स्थानों पर यह लागू होता है. “अधिनियम लागू होने के बाद” इसका मतलब है कि अधिनियम ‘पूर्वव्यापी’ नहीं है, लेकिन कुछ लोग यह भ्रम फ़ैला रहे है कि यह पूर्वव्यापी है. इस विषय पर स्पष्टीकरणकी जरुरत है कि यह पूर्वव्यापी नही है. यह स्पष्टीकरण भ्रम फ़ैलाने लोगोंका मुहं बंद कर देगा.
मुंबई बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यह देखते हुए कि मुंबई और महाराष्ट्र में पगड़ी प्रणाली की आबादी काफी अधिक है, एक स्पष्टीकरण की ज़रूरत है जिसमें ये स्पष्ट किया जाय कि – यह नया एक्ट किरायेदारी और जमींदार संबंधों की पगड़ी प्रणाली पर लागू नहीं होता है. मंत्रालय की ओर से इस स्पष्टीकरण के जारी होने से मुंबई के भूमि मालिक तथा किरायेदारों के बीच उत्पन्न भय का वातावरण स्वयं ही समाप्त हो जायेगा.





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