मुंबई, सात साल पहले उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के एक मकान में एक व्यवसायी व उसके परिवार के ३ अन्य सदस्यों की चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उस घटना ने देहरादून सहित पूरे उत्तराखंड को दहला दिया था। वारदात में एक कारोबारी, उसकी पत्नी, दत्तक पुत्री और तीन साल की नवासी को बेरहमी से कत्ल कर दिया गया था। कत्ल की इस वारदात को किसी गैर ने नहीं, बल्कि कारोबारी के अपने बेटे ने अंजाम दिया था। खास बात ये कि वारदात वाली रात हत्यारोपी ने पांच साल के जिस मासूम को नजरअंदाज करके छोड़ दिया था वही मासूम कृष्ण की तरह अपने कथित कंस मामा को फांसी की सजा दिलवाने की वजह बना।
उपरोक्त घटना देहरादून के वैंâट थाना अंतर्गत आदर्श नगर इलाके में हुई थी। वह वर्ष २०१४ का अक्टूबर महीना था। २२ अक्टूबर की उस रात पूरा देश दीपावली का त्योहार मनाने की तैयारी में लगा था लेकिन उसी दौरान होर्डिंग कारोबारी जय सिंह के परिवार का एक सदस्य मन-ही-मन अपनों के कत्ल की साजिश रचने में लगा था। यह सदस्य कोई और नहीं, बल्कि जय सिंह का बेटा हरमीत था। उसके सिर पर हैवानियत सवार थी और उसी हैवानियत में उसने २२-२३ अक्टूबर की उस अमावस की रात (दीपावली) में अपने पिता जय सिंह, सौतेली मां कुलवंत कौर, चचेरी बहन हरजीत कौर और ३ वर्षीया भांजी सुखमणि का खून कर दिया था। उसने अपने पांच साल के भांजे कंवलजीत पर भी जानलेवा हमला किया था लेकिन वह पलंग के नीचे छिप गया और जानलेवा हमले से बच गया था या यूं कहें कि उस समय तक हरमीत के सिर पर सवार कत्ल का जुनून ठंडा हो गया था। नतीजतन, कंवलजीत की जान बच गई थी।
दीपावली की रात जय सिंह के घर में ४ लोगों का कत्ल हो गया लेकिन हरमीत की करतूत की किसी को भनक तक नहीं लगी। दीपावली की रात होने के कारण हरमीत का शिकार बने लोगों की चीखें पटाखों की आवाज में दबकर रह गई थी। लोगों को इसका पता तब चला जब अगली सुबह जय सिंह की नौकरानी राजी वहां चौका-बरतन करने पहुंची। घर में घुसते ही राजी ने पूरे घर में खून बिखरा देखा। अंदर गई तो वहां हरजीत कौर, सुखमणि, जय सिंह और कुलवंत कौर के लहुलूहान शव पड़े थे। दरवाजे की ओट में हाथ में चाकू लिए हरमीत खड़ा था। पास में ही पांच साल का कंवलजीत भी डरा-सहमा खड़ा था। ये नजारा देखकर राजी की चीख निकल गई और वह बदहवास-सी चिल्लाते हुए बाहर भागी। उसकी चीख सुनकर पूरे मोहल्ले के लोग वहां पहुंच गए। अंदर कमरे का नजारा देखकर सभी की रूह कांप उठी।





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