मुंबई, लोकतंत्र में एक नेता के रूप में राय महत्वपूर्ण होती है, लेकिन लोगों के बीच काम करते समय साहस की भी आवश्यकता होती है। प्रबोधनकार ने वह हिम्मत दिखाई। प्रबोधनकार अतीत की कुरीतियों के खिलाफ डटे रहे। वे नास्तिक नहीं थे लेकिन उन्हें धर्म के नाम पर पाखंड पसंद नहीं था। उन्होंने सिखाया कि देश ही पहले धर्म है, परंतु अगर कोई खुद के धर्म के साथ बुरे विचारों के साथ आगे आता है तो उसे याद रखना चाहिए कि मैं एक कट्टर हिंदू हूं। ये बातें शिवसेनापक्षप्रमुख, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मराठी भाषा विभाग की ओर से वाचन प्रेरणा दिन के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के हाथों ‘सह्याद्रि’ अतिथि गृह में प्रबोधनकार ठाकरे के ‘लेख संग्रह’ का विमोचन और हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे राष्ट्रीय स्मारक वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे के भाषणों की वीडियो क्लिप दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी धर्म से कोई आपत्ति नहीं है। अपने-अपने धर्म का पालन जरूर करें लेकिन अपने घर में। सबसे पहले धर्म हमारा देश है। उन्होंने कहा कि नवहिंदू का जो प्रकार आ रहा है, वह हिंदुत्व के लिए बेहद घातक है। यह हाथी और सात अंधों की कहानी जैसा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ चोटी बढ़ा लेना और जनेऊ पहन लेना ही मेरा हिंदुत्व नहीं है।
प्रबोधनकार ठाकरे की किताबें आज भी प्रासंगिक हैं और सौ साल पहले की झूठी परंपराओं को तोड़ने के आंदोलन के इतिहास से सीखने के लिए आज की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। मैं उनके विचारों की तीन-भाग वाली पुस्तक का विमोचन करना अपना सौभाग्य मानता हूं।
शिवसेनापक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि मेरे विचार से मुख्यमंत्री का बहुमान और प्रबोधनकार का पौत्र होना सौभाग्य की बात है। मैंने उनकी संगत में सीखा। अपने पोते-पोतियों को लाड़-प्यार करनेवाले दादा कितने महान थे। शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब हमें बताते थे कि प्रबोधनकार कितने सख्त थे। उस समय हमारे बचपन में दादाजी राजाओं और रानियों की नहीं, बल्कि उनके विचारों की कहानियां सुनाते थे।
प्रबोधनकार अतीत की कुरीतियों के खिलाफ डंटे रहे। मेरे दादाजी नास्तिक नहीं थे लेकिन उन्हें पाखंड पसंद नहीं था। प्रबोधनकार की पुस्तकों का अनुवाद किया जाना चाहिए, ताकि वे देश के सभी राज्यों में पहुंच सकें। हालांकि, उनकी भाषा का अनुवाद करना चुनौतियों भरा है। यह मेरे लिए खुशी की बात है कि सौ साल बाद भी उनके ग्रंथ का विमोचन मेरे हाथों हो रहा है। यह भावना उन दिनों भी थी जब शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की ‘फटकारे’ पुस्तक का विमोचन किया था। इस अवसर पर उद्योग मंत्री सुभाष देसाई राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।





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