पनवेल, अपनी गलती ‘कोरोना’ के नाम मढ़ने वाले डॉक्टरों पर अदालत का डंडा चला है। पनवेल न्यायालय के आदेश पर नई मुंबई पुलिस ने वाशी और पनवेल के छह डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। आरोप है कि डॉक्टरों की गलती से महिला मरीज की मृत्यु हुई लेकिन डॉक्टरों ने कोरोना से मौत का मृत्यु प्रमाणपत्र देकर असल कारण दबा दिया था।
बता दें कि बीमार महिला वकील अश्विनी थवई को मई में पनवेल के एक अस्पताल में भर्ती किया गया था। ऑपरेशन के दौरान अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें पनवेल के अस्पताल से वाशी के एक अन्य अस्पताल में भेज दिया गया। वहां अश्विनी को एक दिन आईसीयू में रखा गया और दूसरे दिन डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप था कि पनवेल के अस्पताल में अश्विनी को ऑपरेशन से पहले बेहोशी की ज्यादा दवा दे दी गई, वहीं ऑपेरशन के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से उनका खून ज्यादा बहने के कारण अश्विनी की मौत हो गई थी।
परिजनों के अनुसार पनवेल के अस्पताल ने मरने के बाद अश्विनी को वाशी के अस्पताल में ट्रांसफर किया गया था। इसके बावजूद वाशी के अस्पताल ने अश्विनी को एक दिन जिंदा बताया। बाद में अगले दिन डॉक्टर ने वाशी के एक प्राइवेट लैब से कोरोना मृत्यु सर्टिफिकेट लाकर परिजनों को दे दिया। अश्विनी के पति निशांत पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए थे लेकिन उस वक्त पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया था, जिसके बाद निशांत ने पनवेल कोर्ट में अपील की थी। जहां निशांत ने चार लैब्स की रिपोर्ट रखी, जिसमें कहा गया था कि उनकी मौत कोरोना से नहीं हुई है। जिसके आधार पर कोर्ट ने मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।





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