सिलवासा, महाराष्ट्र अथवा देश में गांजे की उपज ज्यादा हो गई है। ऐसा दिखाई दे रहा है कि कुछ लोग गांजा पीकर काम कर रहे हैं। शिवसेना के दशहरा सम्मेलन के बाद विरोधी पक्ष बेबाक बोल रहा है। इन लोगों का नार्को टेस्ट किया जाना चाहिए। ऐसे बेबाक बोलनेवालों का टेस्ट एनसीबी द्वारा किया जाना चाहिए। वे लोग क्या पी रहे हैं? उन्हें कौन देता है? यह समझना जरूरी है। इन शब्दों में शिवसेना नेता, सांसद संजय राऊत ने भाजपा नेताओं पर हमला बोला।
शिवसेना के दशहरा सम्मेलन में शिवसेनापक्षप्रमुख व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के भाषण ने भाजपा सहित विरोधी पार्टियों को झकझोर कर रख दिया है। भाजपा नेता पूरी तरह से सदमे में हैं। उद्धव ठाकरे सहित शिवसेना और महाविकास आघाड़ी के बारे में वे उल्टे-सीधे बयान दे रहे हैं। संजय राऊत ने एक समाचार चैनल को दिए गए साक्षात्कार में भाजपा नेताओं पर जोरदार हमला बोला।
दादरा-नगर हवेली के उपचुनाव में खड़ी शिवसेना की उम्मीदवार कलाबेन डेलकर के प्रचार के लिए सांसद संजय राऊत सिलवासा में हैं। दादरा-नगर हवेली के निर्दलीय सांसद मोहन डेलकर ने मुंबई के एक होटल में आत्महत्या कर ली थी। उनके निधन के बाद रिक्त हुई सीट पर ३० अक्टूबर को उपचुनाव होनेवाला है। डेलकर की पत्नी कलाबेन और पुत्र अभिनव ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की उपस्थिति में हाल ही में शिवसेना में प्रवेश किया था।
दादरा-नगर हवेली और सिलवासा का प्रशासन जिस दहशत के साए में चलाया जा रहा है, उसका उल्लेख मोहन डेलकर ने अपने सुसाइड नोट में किया था। दादरा नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए वहां का प्रशासक आईएएस अधिकारी होता है। लेकिन भाजपा की सत्ता आने के बाद गुजरात में चुनाव हार चुके राजनीतिक व्यक्ति प्रफुल्ल खेड़ा पटेल को यहां की बागडोर सौंपी। आईएएस अधिकारी की जगह पर अन्य किसी व्यक्ति को प्रशासक के तौर पर नियुक्त करना यह संविधान के दायरे में नहीं आता, ऐसा संजय राऊत ने अपने साक्षात्कार में कहा।
दादरा-नगर हवेली में मराठी माणुुस की आर्थिक नसों को दबाने का काम शुरू है। ऐसी टिप्पणी संजय राऊत ने की। उन्होंने मराठी व्यापारी, उद्यमियों की सिलवासा में हुई एक बैठक का हवाला देते हुए कहा कि कारोबारियों ने मुझे उस बैठक में बताया कि मराठी समाज की संख्या यहां बड़े पैमाने पर है। यदि मोहन डेलकर के साथ काम करते हुए कोई दिखाई देता है तो उसके उद्योग-धंधे के लिए मुश्किलें खड़ी की जाती हैं। हमारा काम और दुकानें बंद करा दी जाती हैं। ठेके रद्द कर दिए जाते हैं। यह कहां का लोकतंत्र है? यह सवाल संजय राऊत ने पूछा।
देश का नागरिक होने के नाते मैं किस पार्टी के लिए काम करूं और किस विचारधारा को स्वीकार करूं, यह मेरा अधिकार है। लेकिन दादरा नगर हवेली, सिलवासा में कौन किस पार्टी के लिए काम करे, यह प्रशासक सुनिश्चित करता है। यह कहते हुए संजय राऊत ने महाराष्ट्र के राज्यपाल के भी उदाहरण दिए। आप हमारी पार्टी के नहीं हैं तो हम आपकी फाइल पर सही नहीं करेंगे, यह महाराष्ट्र के राज्यपाल तय करते हैं।





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