मुंबई, दौलत, जाति-पांति का भेद, बाहुबल, सामाजिक-पारिवारिक प्रतिष्ठा का अभिमान इंसान के दिल और दिमाग में आता है तो वह दूसरे लोगों को तुच्छ समझने लगता है। दूसरों की अच्छी और सही बातें भी उसे नागवार लगने लगती हैं। किसी और का मुंह खोलना उसे अपना अपमान लगने लगता है। अकड़ में अंधे हुए ऐसे अभिमानी लोग प्राय: अपना ही नुकसान करते हैं। गुजरात का नडियाद दंगा मामला इसका बेहतरीन उदाहरण है, जिसमें अदालत ने एक पक्ष के १४ लोगों को उम्रवैâद तो वहीं दूसरे पक्ष के ४४ लोगों को १० साल के कारावास की सजा सुनाई।
बात करीब पांच साल पुरानी है। गुजरात के खेड़ा जिला अंतर्गत भीलोदर गांव में केसर बेन सोढा नामक महिला की हत्या हो गई थी। केसर बेन का गुनाह सिर्फ इतना ही था कि वह आपस में लड़ रहे दो समूह के लोगों को रोकने का प्रयास कर रही थी। उसमें से एक समूह के लोग उसके अपने थे लेकिन दोनों समूह के लोग पीछे हटने को तैयार नहीं थे। उन्हें लग रहा था कि ये उनकी तौहीन होगी। अंजाम ये हुआ कि दोनों समूह मरने-मारने को उतारू हो गए। इसी दौरान एक समूह के हमले में बीच-बचाव कर रही केसर बेन बुरी तरह से घायल हो गई। किसी ने उसके सिर पर रॉड से जोरदार प्रहार किया था। अस्पताल पहुंचने से पहले जख्मी केसर बेन के प्राण पखेरू उड़ गए थे।
२८ अगस्त, २०१६ को भीलोदर गांव में केसर बेन की हत्या बेहद मामूली विवाद में हुई थी। हुआ ऐसा था कि केसर बेन के समूह के हरि सिंह सोढा और अन्य लोग मंदिर जा रहे थे। रास्ते में उनका मफतभाई भरवाड़ के साथ झगड़ा गया। झगड़े का कारण मफत भाई का चार पहिया वाहन था, जो कि एप्रोच रोड पर खड़ा था, जिससे लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही थी। मानसून के कारण रास्ता खराब था, उस पर मफत भाई के वाहन के कारण लोग पैदल भी नहीं आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। हरि सिंह ने मफत भाई को उनका वाहन हटाने को कहा, जो कि उन्हें नागवार लगा और फिर बहस शुरू हो गई। जो कि बाद में बलवे में तब्दील हो गई। उसी बलवे में केसर बेन की जान चली गई। उस दंगे में १४ लोग घायल भी हुए थे।
इस संबंध में नडियाद ग्रामीण थाने में दो क्रॉस एफआईआर दर्ज हुई। हरि सिंह सोढा की शिकायत पर मफत भाई सहित १५ लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुआ था। जबकि मफत भाई की शिकायत पर हरिसिंह सहित ४५ लोगों को आरोपी बनाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान ७० दस्तावेजी सबूतों और ४९ गवाहों की गवाही के आधार पर नडियाद सत्र न्यायाधीश डीआर भट्ट की अदालत ने मंगलवार को आरोपी मफतभाई भरवाड़, उनके भाई और उनके समुदाय के अन्य लोगों सहित १५ लोगों को आईपीसी की धारा ३०२ (हत्या) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसी मामले में हरि सिंह सोढा सहित अन्य ४४ आरोपियों को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत १० साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई जबकि एक व्यक्ति को संदेह का लाभ देकर न्यायालय ने बरी कर दिया।





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