मुंबई, आमतौर पर इंसान जानबूझकर अपराध दो ही वजह से करता है पहली वजह है जरूरत और दूसरी लालच। लालच और जरूरत में बड़ा अंतर होता है। जरूरतें सीमित होती हैं और लालच का कोई अंत नहीं होता। जरूरतमंद व्यक्ति परिस्थिति वश अपराध कर बैठता है, जबकि लालची लोग सोच-समझकर योजनाबद्ध ढंग से आपराधिक वारदातों को न सिर्फ अंजाम देते हैं, बल्कि उससे बचने की हरसंभव कोशिश भी करते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है दहेज लोभी कांस्टेबल पवन कुमार की, जिसे अदालत से मौत की सजा मिली है।
देश में दहेज के लिए दुल्हनों को प्रताड़ित करने की खबरें अक्सर सामने आती हैं। जब दहेज लोभी दुल्हनों-बहुओं को प्रताड़ित करके अपने मंसूबे पूरे नहीं कर पाते हैं तो उनका लालच उन्हें कत्ल जैसा गुनाह करने के लिए प्रेरित करता है। कुछ ऐसा ही हुआ था जम्मू-कश्मीर पुलिस में तैनात कांस्टेबल पवन कुमार के साथ।
वैसे तो जम्मू-कश्मीर में अक्सर आतंकियों की बंदूक से निकली गोलियों की तड़तड़ाहट अक्सर गूंजती रहती है लेकिन वर्ष २०१२ के दिसंबर महीने में कुछ अलग हुआ था। हुआ ऐसा था कि एक परिवार के तीन लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। इस वारदात में एक शख्स, उसकी पत्नी और बेटी पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गई थीं। खास बात ये थी कि गोली मारनेवाला पीड़ित परिवार का अपना ही था। आरोपी की शिनाख्त पवन कुमार के रूप में सामने आई। पवन जम्मू पुलिस में कांस्टेबल था और उसने अपनी पत्नी चंपा देवी, सास सुमित्रा देवी और ससुर देसराज पर हत्या के इरादे से गोलियां बरसाई थीं। बाद में पवन ने खुद को भी गोली मार ली थी। जम्मू के गंडोह थाना क्षेत्र में घटी उस घटना ने पूरे जिले को दहला दिया था।
देशराज के परिवार पर गोलीबारी की शिकायत उनके भतीजे राजकुमार ने पुलिस में दर्ज कराई थी। उसने तहरीर में बताया था कि चार साल पहले देशराज ने अपनी बेटी चंपा देवी की शादी पुलिस कांस्टेबल पवन कुमार से की थी। शादी के कुछ समय बाद ही पवन ने दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी चंपा देवी को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इस वजह से चंपा देवी अक्सर मायके आती रहती थी। २ दिसंबर की रात पवन एके-४७ राइफल लेकर देशराज के घर पहुंचा और अपनी पत्नी चंपा देवी, सास सुमित्रा देवी और ससुर देशराज पर फायरिंग शुरू कर दी। बाद में उसने खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। प्रधान सत्र न्यायाधीश भद्रवाह ने इस मामले में पुलिस कांस्टेबल को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है। अदालत के इस पैâसले की पुष्टि के लिए अब मामले को जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय भेज दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार अपने लोगों की रक्षक है और इस संकट में मदद के लिए आगे आना सरकार का कर्तव्य है। अदालत ने सरकार को मृतक सुमित्रा देवी के परिवार को एक लाख रुपए और घायल देशराज को बीस हजार रुपए का मुआवजा देने और चंपा देवी के बच्चों की परवरिश के लिए दो लाख रुपए की सहायता देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर सरकार से दो महीने के भीतर यह सहायता राशि उपलब्ध कराने को कहा है।





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