मुंबई, दिवाली के मौके पर झोपड़ाधारकों को महाविकास आघाड़ी सरकार ने दिवाली का तोहफा दिया है। २००१ से २०११ तक बने झोपड़ों में रहनेवाले पात्र झोपड़ाधारकों को अब ढाई लाख रुपए का शुल्क लेकर सरकार ने उन्हें आवास मुहैया करवाने का निर्णय लिया है। गृह निर्माण विभाग के इस निर्माण के बाद झोपड़पट्टी में रहनेवाले लाखों परिवारों का झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए) की परियोजना में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।
एसआरए योजना के तहत वर्ष २००० तक बने घरों में रहनेवाले पात्र झोपड़ाधारकों को मुफ्त में घर दिया जाता है। मुंबई को स्लम मुक्त करने और स्लम में रहनेवाले अन्य नागरिकों को एसआरए का लाभ पहुंचाने के लिए महाविकास आघाड़ी सरकार ने २००१ से २०११ तक के बने झोपडों को शुल्क के साथ पुनर्वसन योजना में शामिल करने का निर्णय लिया था। दिवाली के अवसर पर गृह निर्माण विभाग ने शुल्क की रकम ढाई लाख रुपए निर्धारित कर दी है।
गृह निर्माण मंत्री जितेंद्र आव्हाड के मुताबिक २०११ तक के बने झोपड़ों को कुछ शुल्क के साथ एसआरए योजना में शामिल करने का नियम पहले से है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र परिवार को ढाई लाख रुपए का शुल्क देना होगा।
एसआरए के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ढाई लाख रुपए का शुल्क भरकर एसआरए योजना का लाभ केवल पात्र परिवारों को मिलेगा। अब तक २००० तक के बने झोपडों में रहनेवाले पात्र परिवारों को सरकारी योजना के तहत मुफ्त में घर मिलता था। नए आदेश के अनुसार २०११ तक के बने झोपड़ों में रहनेवाले पात्र परिवारों से ढाई लाख रुपए का शुल्क लेकर उनको एसआरए के तहत बननेवाले प्रॉजेक्ट में अब घर उपलब्ध कराए जाएंगे।
महाविकास आघाड़ी सरकार आए दिन जनता के हित में उचित पैâसले ले रही है। एसआरए परियोजना के देरी से पूरा होने से परेशान हजारों परिवारों को सरकार ने राहत की खबर दी है। डेवलपर्स की मनमानी और नागरिकों की समस्या को ध्यान में रखते हुए गृहनिर्माण विभाग ने झोपड़पट्टीवासियों को पांच साल में घर बेचने का अधिकार अब दे दिया है। गृहनिर्माण मंत्री के मुताबिक पुनर्वसन परियोजना के तहत पात्र झोपड़ाधारक के घर खाली करने और घर टूटने के दिन से पांच वर्ष बाद वे अपने घर बेच सकते हैं। घर की बिक्री करने से पहले परिवार को एसआरए की अनुमति लेनी होगी। बता दें कि मुंबई में सैकड़ों परियोजना वर्षों से लंबित पड़ी हुई है। निर्माणकार्य पूरा नहीं होने की वजह से नागरिकों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में डेवलपर्स द्वारा प्रोजेक्ट पूरा होने तक वैकल्पिक घर का किराया भी नहीं देने की बात सामने आती रहती है। ऐसे में एसआरए ने घर खाली करने के दिन से पांच वर्ष बाद घर बेचने का अधिकार परिवार को देने का निर्णय लिया है। बता दें कि अब तक एसआरए का घर प्राप्त होने के १० साल तक लोग घर नहीं बेच सकते हैं।





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