पटना, बिहार पंचायत चुनाव में बॉयोमैट्रिक मशीन के इस्तेमाल ने बोगस वोटर्स को तो रोक दिया लेकिन इसने बैंकिंग प्रâॉड को न्योता दे दिया है। यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है, क्योंकि मुंगेर में हुए मतदान में यह मामला सामने आ चुका है। जहां वोटिंग के लगभग १ घंटे बाद १२ वोटर्स के अकाउंट से पैसे निकाल लिए गए। हालांकि इस मामले में आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन इस घटना ने कई सवाल खड़ा कर दिए हैं।
साइबर एक्सपर्ट संतोष प्रसाद ने बताया कि बॉयोमैट्रिक मशीन ऑपरेट कर रहा शख्स अगर चाहे तो वोटर के फिंगर प्रिंट को सुरक्षित कर सकता है और उसका वह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल भी कर सकता है। मुंगेर में जो घटना हुई, उसमें ऐसी ही तकनीक का सहारा लिया गया।
संतोष प्रसाद के मुताबिक, ऐसे मामलों में जब बॉयोमैट्रिक मशीन पर बैठा व्यक्ति प्रâॉड के मामलों में संलग्न होता है तो वह इसके लिए सिलिका जेल का इस्तेमाल करता है। सिलिका एक बेहद पारदर्शी जेल होता है, जो बॉयोमैट्रिक मशीन की फिंगर प्रिंट वाले एरिया पर लगा दिया जाता है। इसके बाद जब कोई व्यक्ति इस मशीन पर अपनी उंगली रखता है तो उसका फिंगर प्रिंट जेल पर प्रिंट हो जाता है। उसके बाद यह कहते हुए कि आपका फिंगर प्रिंट नहीं आया मशीन पर बैठा व्यक्ति बॉयोमैट्रिक मशीन को सामने से हटा कर धीरे से उस पर लगा सिलिका जेल का लेयर निकाल लेता है। उसके बाद कपड़े से पोछकर यह दिखाने की कोशिश करता है कि बॉयोमैट्रिक पर लगा धूल के कारण वोटर का फिंगर प्रिंट एक्सेस नहीं हो सका। वोटर को दोबारा बॉयोमैट्रिक पर उंगली रखने के लिए कहा जाता है।





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