मुंबई. महाराष्ट्र और मुंबई में कोरोना वायरस संक्रमण के आंकड़ों में सोमवार को गिरावट दर्ज की गई. मुंबई में कम मरीजों के मिलने को जानकार ‘संडे इफेक्ट’ बता रहे हैं. वहीं, कुछ एक्सपर्ट्स इसे अच्छा संकेत मान रहे हैं. मुंबई में सोमवार को संक्रमण के मामलों में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. शहर में 13 हजार 468 नए मरीज मिले हैं. रविवार को यह आंकड़ा 19 हजार 474 पर था. इसके अलावा शहर में पॉजिटिविटी रेट भी कम होकर 23 फीसदी पर आ गया.
आंकड़ों को देखें, तो 7 जनवरी से ही मुंबई में मामलों में गिरावट जारी है. शुक्रवार को शहर में 20 हजार 971 मरीज मिले थे, जो 8 जनवरी यानि शनिवार को कम होकर 20 हजार 318 पर आ गए. रविवार को यह आंकड़ा 19 हजार 474 पर था. सोमवार को नए संक्रमितों की संख्या भारी गिरावट के साथ 13 हजार 648 पर आ गई.
खास बात है कि मुंबई में सोमवार को कम मरीजों की संख्या के तार टेस्टिंग के आंकड़ों से भी जुड़े हो सकते हैं. बृह्नमुंबई महानगरपालिका ने 7 जनवरी को 72 हजार 442 टेस्ट किए थे. उस दौरान टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 29 फीसदी था. 8 जनवरी को 28.6 फीसदी टीपीआर के साथ 71 हजार 19 जांचें हुईं. 9 जनवरी को टीपीआऱ 28.5 प्रतिशत था और 68 हजार 249 टेस्ट किए गए थे. 10 जनवरी को 59 हजार 242 टेस्ट हुए और टीपीआऱ 23 प्रतिशत रहा.
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉक्टर प्रदीप व्यास ने बताया कि आंकड़ों में कमी का कारण ‘संडे इफेक्ट’ है. डॉक्टर प्रदीव अवाते ने कहा कि आबादी का बड़ा हिस्सा पहले ही प्रभावित हो चुका है, इसलिए संक्रमण के जोखिम वाली आबादी का अनुपात कम हो गया है. उन्होंने कहा, ‘जैसा की दक्षिण अफ्रीका में देखा गया, पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 32.34 फीसदी पर पहुंच गया था और अचानक कम हो गया था. वायरस की भी सीमा होती है. इसलिए ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि चरम खत्म हो चुका है, लेकिन अगले एक हफ्ते का डेटा मिलने तक कुछ भी पुख्ता रूप से नहीं कहा जा सकता.’
आंकड़ों को देखें, तो 7 जनवरी से ही मुंबई में मामलों में गिरावट जारी है. शुक्रवार को शहर में 20 हजार 971 मरीज मिले थे, जो 8 जनवरी यानि शनिवार को कम होकर 20 हजार 318 पर आ गए. रविवार को यह आंकड़ा 19 हजार 474 पर था. सोमवार को नए संक्रमितों की संख्या भारी गिरावट के साथ 13 हजार 648 पर आ गई.
खास बात है कि मुंबई में सोमवार को कम मरीजों की संख्या के तार टेस्टिंग के आंकड़ों से भी जुड़े हो सकते हैं. बृह्नमुंबई महानगरपालिका ने 7 जनवरी को 72 हजार 442 टेस्ट किए थे. उस दौरान टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 29 फीसदी था. 8 जनवरी को 28.6 फीसदी टीपीआर के साथ 71 हजार 19 जांचें हुईं. 9 जनवरी को टीपीआऱ 28.5 प्रतिशत था और 68 हजार 249 टेस्ट किए गए थे. 10 जनवरी को 59 हजार 242 टेस्ट हुए और टीपीआऱ 23 प्रतिशत रहा.
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉक्टर प्रदीप व्यास ने बताया कि आंकड़ों में कमी का कारण ‘संडे इफेक्ट’ है. डॉक्टर प्रदीव अवाते ने कहा कि आबादी का बड़ा हिस्सा पहले ही प्रभावित हो चुका है, इसलिए संक्रमण के जोखिम वाली आबादी का अनुपात कम हो गया है. उन्होंने कहा, ‘जैसा की दक्षिण अफ्रीका में देखा गया, पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 32.34 फीसदी पर पहुंच गया था और अचानक कम हो गया था. वायरस की भी सीमा होती है. इसलिए ताजा आंकड़े दिखाते हैं कि चरम खत्म हो चुका है, लेकिन अगले एक हफ्ते का डेटा मिलने तक कुछ भी पुख्ता रूप से नहीं कहा जा सकता.’





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