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राजनीतिक पेच कायम!

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मुंबई, ईडी, सीबीआई जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का उपयोग कर राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार को अस्थिर करने की साजिश शुरू है। इसी के तहत केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा ने महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल घटक दल के विधायकों पर दबाव बनाकर और लालच दिखाकर तोड़फोड़ की राजनीति शुरू की है, इसके चलते महाराष्ट्र में पैदा हुआ राजनीतिक पेच तीसरे दिन भी जारी है। राज्य में सत्ता परिवर्तन लाने के लिए डाले गए इस जाल में नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे फंस गए और वे शिवसेना के कुछ विधायकों को लेकर सूरत होते हुए गुवाहाटी पहुंच गए, वहीं गुवाहाटी में शरण लेने पहुंचे शिंदे गुट को होटल रेडिसन ब्लू में पूरी तरह से कैद करके रखा गया है। वहां से उनका निकलना फिलहाल मुश्किल हो गया है।
महाराष्ट्र में जब से महाविकास आघाड़ी सरकार सत्ता में आई है, तब से भाजपा विभिन्न तरीकों से इसे अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। महाविकास आघाड़ी सरकार में शामिल घटक दलों शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस की एकता को खंडित करने में वे सफल नहीं हुए। ऐसे में महाविकास आघाड़ी के प्रमुख नेताओं के पीछे केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच की झड़ी लगाकर राज्य सरकार के लिए मुश्किलें पैदा करते हुए पिछले कुछ महीनों से महाराष्ट्र को बदनाम करने का धंधा चल रहा है। हालांकि बीते ढाई सालों में वे इसमें सफल नहीं हुए, वहीं राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव के अवसर पर विधायकों पर दबाव डालकर उन्हें बहला-फुसलाकर राज्य से बाहर ले जाकर भाजपा शासित राज्य में वैâद कर रखा गया, जिससे महाराष्ट्र की राजनीति में अस्थिरता पैदा हो गई है।
महाविकास आघाड़ी सरकार में एकनाथ शिंदे के विद्रोह के पीछे कौन है? यह स्पष्ट करते हुए देश के राष्ट्रीय दलों की सूची राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने पढ़ी। पवार ने कहा कि एकनाथ शिंदे का वीडियो टेलीविजन पर देखा। उसमें स्पष्ट है कि उन्हें राष्ट्रीय दल का समर्थन है। मेरे पास सूची है, जिसमें भाजपा, बसपा, कम्युनिस्ट पार्टी सीपीआई, सीपीएम, राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी राष्ट्रीय दल हैं। यह चुनाव आयोग द्वारा जारी सूची है, इसमें बसपा, कम्युनिस्ट पार्टी सीपीआई, सीपीएम, राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में से किसी का हाथ है क्या? और नहीं तो उन्हें समर्थन देनेवाला कौन है? यह कहने की जरूरत नहीं है। शिंदे की बगावत के पीछे भाजपा का हाथ है।