Home Crime ४२,००४ दिहाड़ी मजदूरों ने की आत्महत्याएं

४२,००४ दिहाड़ी मजदूरों ने की आत्महत्याएं

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मुंबई, अच्छे दिन का सपना दिखाकर केंद्र की सत्ता हासिल करनेवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन काल में लोगों का दर्द बढ़ रहा है। मोदी के नेतृत्ववाली भाजपाई सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में महंगाई और बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ी है। नतीजतन लोगों के लिए अपना और अपने परिवार का गुजारा मुश्किल हो गया है। नतीजतन अपराध बढ़ रहे हैं। हताशा में लोग जीने के बजाय मौत को गले लगाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं और इसका सबसे दुखद पहलू ये है कि सरकार से कोई अपेक्षा रखे बगैर मेहनत-मजदूरी करके अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ करनेवाले लोग भी अब टूटने लगे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक साल २०२१ में एक लाख ६४ हजार से अधिक लोगों ने सुसाइड किया। सुसाइड करने वालों में सबसे अधिक तादाद दैनिक वेतन भोगी यानी दिहाड़ी मजदूरों की है। जबकि प्रतिदिन करीब ८२ लोगों का कत्ल होता है और हर ११ घंटे में अपहरण का मामला दर्ज होता है।
एनसीआरबी के द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार वर्ष २०२० की तुलना में वर्ष २०२१ में हत्या, अपहरण और खुदकुशी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। साल २०२० में सुसाइड के देशभर में १ लाख ५३ हजार ५२ मामले सामने आए थे। इनमें से ३७ हजार ६६६ दिहाड़ी मजदूर थे यानी कुल सुसाइड में दिहाड़ी मजदूरों की तादाद चिंताजनक रूप से २४.६ फीसदी पहुंच गई थी। चिंता की बात ये है कि साल २०१४ के बाद से दिहाड़ी मजदूरों के सुसाइड करने के मामले लगातार बढ़े हैं। नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, २०२१ में हर दिन औसतन ८२ लोगों की हत्या हुई है। हत्या के ९,७६५ मामलों में ‘विवाद’ कारण बना। ३,७८२ मामले निजी शत्रुता और १,६९२ मामले निजी लाभ से जुड़े थे। अपहरण की बात करें, तो २०२१ में देश में हर घंटे ११ से ज्यादा लोगों का अपहरण हुआ। कुल अपहृतों में ६९,०१४ बच्चे (१०,९५६ लड़के, ५८,०५८ लड़कियां) और ३५,१३५ वयस्क (६,६४९ पुरुष, २८,४८५ महिला, एक ट्रांसजेंडर) थे। प्रति लाख आबादी पर हत्या के मामले में झारखंड और अपहरण के मामले में दिल्ली की स्थिति सबसे खराब है। झारखंड में हत्या के १,५७३ मामलों में कुल १,६०६ लोगों की जान गई। प्रति लाख आबादी पर यह दर ४.१ रही। इसी तरह, दिल्ली में अपहरण के ५,५२७ मामले दर्ज हुए, जिनमें पीड़ितों की संख्या ५,८८८ रही। प्रति लाख आबादी पर यह दर २६.७ रही, जो सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे ज्यादा है।
महिलाओं के विरुद्ध अपराध की स्थिति भी खराब हुई है। २०२१ में रोजाना ८६ के औसत के साथ दुष्कर्म के ३१,६७७ मामले दर्ज हुए। वर्ष २०२० में यह संख्या २८,०४६ थी।