पालघर, पढ़ना है जरूरी इसलिए रोज है यह मजबूरी। यह कोई स्लोगन नहीं है, बल्कि पालघर के ग्रामीण इलाकों में स्कूल जानेवाले बच्चों की कष्टभरी हकीकत है, जो उनकी रोज की जिंदगी का एक हिस्सा बन गया है। जिले के आदिवासी क्षेत्र जव्हार तालुका की आकरे ग्रामपंचायत स्थित आंबेचापाडा-तासुपाड़ा में कई गांव के १ से लेकर १२वीं तक के स्कूली बच्चे रोज जान हथेली पर लेकर एक तटबंध के सहारे नदी को पार कर स्कूल पहुंचते हैं। इन बच्चों ने प्रधानमंत्री मोदी जी से मार्मिक अपील की है कि आजादी के अमृत महोत्सव पर एक पुल बनवाकर उनकी समस्या का हल किया जाए।
देश में आज भले ही शिक्षा का अधिकार कानून लागू है लेकिन पालघर के दूर-दराज के इलाकों में रहनेवाले बच्चों के लिए शिक्षा हासिल करना किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते कई वर्षों से गांव के बच्चे व आस-पास रहनेवाले ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार कर अपनी मंजिल तक पहुंचने को मजबूर हैं।
गौरतलब है कि बरसात के मौसम में जहां जिला प्रशासन नदी-नालों में जाने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाता है, वहीं पालघर के आदिवासी बाहुल्य इलाके के लोग इन नियमों की अनदेखी करने को मजबूर हैं और यहां के स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर बहती हुई नदी पार करके स्कूल जाते हैं। इलाके के विभिन्न गांवों के लोग सालभर अपनी जान जोखिम में डालकर रोजाना इस नदी को पार करते हैं।
लोगों का कहना है कि वर्षों से ही इस नदी को पार करने की समस्या से हम ग्रामीण जूझ रहे हैं। इस समस्या को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों को अवगत करा चुके हैं लेकिन कोई भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि से लेकर प्रशासनिक अधिकारी इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।





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