Home Maharashtra मनोर में मुंबई-अमदाबाद हाईवे पर यातायात रोककर जमकर प्रदर्शन

मनोर में मुंबई-अमदाबाद हाईवे पर यातायात रोककर जमकर प्रदर्शन

43
0

पालघर, आरक्षण में गड़बड़ी किए जाने की आशंका को लेकर आदिवासी एवं मछुआरा समुदाय का गुस्सा रविवार को सड़क पर आ गया। तमाम संबंधित संगठनों के नेतृत्व में हजारों आदिवासी समुदाय के लोगों ने दोपहर को पालघर के मनोर में मुंबई-अमदाबाद हाईवे पर यातायात रोक दिया और यहां जमकर प्रदर्शन किया। सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारी आदिवासियों ने आरोप लगाया कि सरकार की आदिवासियों के आरक्षण को लेकर नीयत साफ नहीं और वह इसमें घुसपैठ करना चाहती है। आदिवासियों के प्रदर्शन के दौरान घंटों कई किलोमीटर तक हाईवे पर यातायात प्रभावित रहा।
धनगर समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की किसी भी योजना के विरोध में आदिवासी एकता परिषद और भूमि सेना संगठनों के करीब हजारों आदिवासियों ने रविवार को पालघर के मनोर में मुंबई-अमदाबाद हाईवे पर यातायात रोककर जमकर प्रदर्शन किया।
हजारों आदिवासी हाथों में तख्तियां लिए हुए नारे लगा रहे थे। कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि धनगर समुदाय को एसटी का दर्जा देना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की एक चाल है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि धनगर समुदाय को पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण मिला हुआ है और उन्हें एसटी का दर्जा देने से आदिवासियों के लिए अवसर और कम हो जाएंगे।
भूमि सेना के अध्यक्ष और आदिवासियों के दिग्गज नेता कालू राम धोधड़े ने कहा कि सरकार आदिवासियों का चौतरफा हक मार रही है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन छीनने के बाद सरकार अब आदिवासियों के आरक्षण में भी घुसपैठ कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार आरक्षण को हथियार बनाकर आपस में विभिन्न जातियों को लड़वाने का षड्यंत्र रच रही है। कालू राम धोधड़े ने सरकार से स्कूलों के निजीकरण के पैâसले को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा सरकार हिटलरशाही पर उतर गई है।
पालघर के समुद्र तट पर स्थित वाढ़वन जिसे गोल्डन बेल्ट कहा जाता है। यहां केंद्र सरकार की अन्य दूसरी परियोजनाओं को लेकर भी किसान और मछुआरे विरोध कर रहे हैं। राज्य की राजधानी मुंबई से लगे पालघर जिले में ही पर्यावरण के लिए अति-संवेदनशील क्षेत्र वाढ़वण में बंदरगाह बनाने से जुड़ी परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों ने हाईवे पर प्रदर्शन कर उन्हें उजाड़ने का आरोप लगाया। मछुआरों का कहना था कि इस परियोजना से कई गांवों की करीब एक लाख आबादी के प्रभावित होने की आशंका है। यह क्षेत्र जैव-विविधता और मछुआरों की आजीविका की दृष्टि से भी अहम है।