मुंबई, महानगर मुंबई में प्रदूषण कम करने के लिए मनपा भले ही एड़ी- चोटी का जोर लगा रही है, लेकिन प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। मनपा की तमाम कोशिशों के बावजूद मुंबई की हवाओं में धुआं-धुआं ही नजर आ रहा है। सुबह से ही हवाएं धुंधली दिख रही है। सोमवार को दिनभर सबसे अधिक प्रदूषित हवाएं कुलाबा और बीकेसी में रिकॉर्ड की गई, जबकि मुंबई में औसतन वायु गुणवत्ता सूचकांक १५० के आस-पास रही, जबकि कोलाबा और बीकेसी में वायु गुणवत्ता सबसे खराब देखने को मिली।
प्रदूषण से संबंधित रेटिंग करनेवाली सफल संस्था की रिपोर्ट की मानें तो सोमवार को बीसी में २३० एक्यूआई था तो कोलाबा में २४० एक्यूआई था। जानकारों की मानें तो मुंबई में प्रदूषण के लिए बड़े पैमाने पर शुरू निर्माण कार्य है। यहां मेट्रो और अन्य परियोजनाओं के काम शुरू हैं। बीकेसी में जहां मेट्रो सहित बुलेट ट्रेन के काम की योजना है तो वहीं कुलाबा में भी अंडरग्राउंड मेट्रो के काम शुरू हैं। ऐसे में इन इलाकों में प्रदूषण चाहकर भी कम नहीं हो रहा है।
बता दें कि बढ़ते प्रदूषण के कारण मुंबई में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के चलते पिछले कुछ हफ्तों से धुंध भरी सुबह हो रही है। अब भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार सुबह से ही शहर और उपनगरों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की भविष्यवाणी की है। मौसम विभाग के अनुसार, शहर और उपनगरों में दोपहर और शाम तक आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। तापमान भी २४ डिग्री से ३० डिग्री के बीच रहा, जबकि आर्दता ७६ प्रतिशत थी।
राज्य के करीब १७ शहरों में वायु प्रदूषण का खतरा राज्य सरकार द्वारा किए गए सर्वे में सामने आया है। इन शहरों में मुंबई, नई मुंबई, बदलापुर, उल्हासनगर, नाशिक, जालना, जलगांव, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, नागपुर, चंद्रपुर, अमरावती, अकोला, लातूर, छत्रपति संभाजीनगर का समावेश है। इन शहरों में वायु प्रदूषण के कारण रोगियों का सर्वेक्षण किया गया। प्रत्येक शहर में सेंटिनल अस्पतालों के आपातकालीन यूनिट में सांस संबंधी रोग पंजीकृत किए गए हैं। संबधित शहरों में दर्ज प्रतिदिन एक्यूआई स्तर व सांस के रोगियों की जानकारी संकलित करने का आदेश राज्य सरकार की ओर से दिया गया है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण खांसी, आंख, नाक आदि रोगों से लोग ग्रसित है। इतना ही नहीं बदलते मौसम के बीच वायु की गुणवत्ता में गिरावट लोगों के लिए परेशानी बन चुकी है। सात हजार लोगों के बीच लोकल सर्किल सर्वेक्षण से पता चला कि मुंबई में ७८ प्रतिशत परिवारों में एक व्यक्ति वायु प्रदूषण से संबंधित बीमारियों से पीड़ित है। ४४ प्रतिशत ने आंखों में जलन का अनुभव किया। ८५ प्रतिशत ने निर्माणस्थलों को और ६२ प्रतिशत ने वाहनों के उत्सर्जन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।





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