मुंबई: गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2025 के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान पद्म पुरस्कारों की। इस साल ये पुरस्कार कुल 139 लोगों मिलेगा। इन पुरस्कारों में 7 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं।
इन पुरस्कारों के प्राप्तकर्ताओं में महाराष्ट्र की पांच हस्तियों भी शामिल है, जिन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। महाराष्ट्र के दो हस्तियों को मरणोपरांत इस खिताब से नवाजा जा रहा है।
देवेंद्र फडणवीस ने दी बधाई
देश के सभी पद्म पुरस्कार विजेताओं को बधाई। महाराष्ट्र के पद्म पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई और सलाम! अपने कार्यक्षेत्र में आपका योगदान महाराष्ट्र के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। महाराष्ट्र में सभी को आपकी सफलता पर गर्व है।
महाराष्ट्र से पद्म पुरस्कार प्राप्तकर्ता पद्म भूषण में तीन नाम शामिल है। मनोहर जोशी और पंकज उधास को ये पद्म पुरस्कार मरणोपरांत दिया जा रहा है और इनके अलावा कला के क्षेत्र में शेखर कपूर को दिया जाने वाला है।
इन्हें पद्मश्री से किया जाएगा सम्मानित
इसके अलावा पद्मश्री से भी 11 लोगों को नवाजा जाएगा। इनमें अच्युत पलव को कला क्षेत्र में, अरुंधति भट्टाचार्य को व्यापार और उद्योग क्षेत्र में, अशोक सराफ और अश्विनी भिड़े देशपांडे को कला के क्षेत्र में, चैतराम देवचंद पंवार को सामाजिक सेवाओं में योगदान के लिए पद्मश्री दिया जाएगा।
इनके अलावा सामाजिक सेवाओं के लिए जसपिंदर नरूला, साहित्य और शिक्षा अरण्यऋषि मारुति चितमपल्ली, कला क्षेत्र में राजेंद्र मजूमदार और वासुदेव कामत, कृषि क्षेत्र में सुभाष शर्मा और चिकित्सा के क्षेत्र में नागपुर के डॉ. विलास डांगरे को पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा।
देवेंद्र फडणवीस ने किया पोस्ट
मैं लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी और वरिष्ठ गायक पंकज उधास को नमन करता हूं। हमने हाल ही में अशोक सराफ को महाराष्ट्र भूषण से सम्मानित किया और आज मुझे विशेष खुशी है कि उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्हें हार्दिक बधाई।
मारुति चितमपल्ली, जिन्हें हम वन ऋषि कहते हैं, उन्होंने पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और फूलों से जो साहित्य रचा है, वह बेजोड़ है। उन्होंने पहली पक्षी सूची बनाई। 18 भाषाओं के जानकार चितमपल्ली ने 21 से अधिक पुस्तकें लिखीं। प्रकृति एक जीवित प्राणी है, इस विश्वास के साथ जीते हुए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए जो काम किया, वह अप्रतिम है। वैसे तो वे सोलापुर से हैं, लेकिन उनका कार्यक्षेत्र विदर्भ है।
डॉ. विलास डांगरे ने होम्योपैथी के माध्यम से लाखों जरूरतमंदों की जो सेवा की है, वह बेमिसाल है। खासकर हाल ही में, अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद, उन्होंने इसे कभी भी अपनी समाज सेवा में बाधा नहीं बनने दिया। नागपुर-विदर्भ के इन दोनों रत्नों के लिए यह एक अनूठा सम्मान है। मैं उन्हें बधाई भी देता हूं और उनके भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं भी देता हूं।





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