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बुजुर्ग पिता की देखरेख में लापरवाही; बेटे को बॉम्बे हाईकोर्ट ने घर से बाहर का रास्ता दिखाया

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मुंबई : जीवन के अंतिम पड़ाव में 88 वर्षीय बुजुर्ग पिता की देखरेख में लापरवाही करने वाले बेटे को बॉम्बे हाईकोर्ट ने घर से बाहर का रास्ता दिखाया है। कोर्ट ने बेटे को तीन हफ्ते में फ्लैट से अपना सामान हटाने का निर्देश दिया है। सीनियर सिटिजन अपीलेट ट्रिब्यूनल के आदेश को कायम रखते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने पिता के उत्पीड़न के आरोपों पर बेटे के नाम पर की गई गिफ्ट डीड को अमान्य घोषित किया था। बेटे की याचिका को खारिज कर हाई कोर्ट ने साफ़ किया है कि गिफ्ट डीड में इस शर्त को शामिल करना जरूरी नहीं है कि डीड का लाभार्थी सीनियर सिटीजन की जीवन की जरूरतों का ध्यान रखेगा। सीनियर सिटिजन की देखरेख अपने आप में समाहित है। हमें अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश में कोई विसंगति नजर नहीं आती है।
पिता की देखभाल करने में विफल रहा बेटा

जस्टिस जमादार ने कहा, यह डीड इस उम्मीद से की गई थी कि बेटा अपने पिता का ख्याल रखेगा, लेकिन बेटा पिता की देखभाल करने में विफल रहा। गिफ्ट sts के बाद बेटे का आचरण बदल गया। उसने पिता का अपमान करना शुरू कर दिया। बुजुर्ग के भरण-पोषण का प्रबंध करने में बेरुखी दिखाई। जस्टिस जमादार ने कहा, इस मामले में जिन परिस्थितियों में गिफ्ट डीड हुई थी वह काफी अहम है। सीनियर सिटिजन मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऐक्ट का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने में मदद करना है।
इलाज के समय की थी गिफ्ट डीड
बेटे ने याचिका में तर्क दिया था कि पिता ने अपनी इच्छा से गिफ्ट डीड की थी। कोई जबरदस्ती या दबाव नहीं डाला गया थी। डीड में देखरेख की शर्त का जिक्र नहीं था। इसके बावजूद पिता की अच्छे से देखभाल हुई। इस पर जस्टिस एनजे जमादार ने कहा, बुजुर्ग जब शारीरिक और भावनात्मक संकट में थे। वे अस्पताल में संदिग्ध गले के कैंसर का उपचार करा रहे थे। तभी बेटे ने बुजुर्ग पिता को खुद की कमाई से खड़ा किया गया कारोबार ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया था। लगभग 50 लाख रुपये बुजुर्ग के खाते से निकाल लिए गए। बुजुर्ग ने पोते और बेटे के नाम पर फ्लैट की गिफ्ट डीड की थी।