मुंबई : गड़चिरोली जिले में नगर परिषद चुनाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। ज्यादातर जगहों पर भाजपा समेत अन्य दलों ने नगराध्यक्ष तथा पार्षद पदों के संभावित उम्मीदवार तय कर लिए हैं। लेकिन सत्ताधारी भाजपा में इच्छुकों की संख्या अधिक होने के कारण नगराध्यक्ष पद की टिकट को लेकर विवाद पैदा हो गया है। अब यह फैसला पार्टी की मुंबई बैठक में होगा। 4 में से 2 महिला उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर चल रही है, इसलिए किसे टिकट मिलेगा इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। गडचिरोली जिले की आरमोरी और देसाईगंज नगरपालिकाओं में चुनावी माहौल गर्म है। सभी प्रमुख दलों में हलचल तेज हो गई है, लेकिन सबसे ज्यादा गुटबाजी भाजपा में दिख रही है। पिछली बार तीनों नगर परिषद में भाजपा का दबदबा था, मगर इस बार टिकट बंटवारे को लेकर घमासान मचा है।
जातिवर्ग के लिए खुला नगराध्यक्ष पद
नगराध्यक्ष तथा पार्षद पदों के लिए इच्छुकों की भीड़ बढ़ने से नेताओं को भारी दबाव झेलना पड़ रहा है। असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने में भी नेताओं की काफ़ी मशक्कत हो रही है। पिछले चुनाव में भाजपा ने गड़चिरोली नगर परिषद की 27 में से 19 सीटें तथा देसाईगंज की 21 में से 13 सीटें जीती थीं। इस बार गडचिरोली नगराध्यक्ष पद सभी के लिए जातिवर्ग के लिए खुला है।
भाजपा में कई महिलाएं इच्छुक हैं, लेकिन किसी एक नाम पर सहमती नहीं बन पा रही है। विभिन्न गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम आगे बढ़ाए हैं, इसलिए अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व पर छोड़ दिया गया है। भाजपा ने इस मुद्दे पर मुंबई में विशेष बैठक बुलाई है, जिसमें आधिकारिक उम्मीदवार का नाम तय होने की संभावना है।
देसाईगंज तथा आरमोरी में भी गुटबाजी
गड़चिरोली ही नहीं, बल्कि देसाईगंज और आरमोरी नगर परिषद में भी गुटबाजी साफ नजर आ रही है। आरमोरी (अनुसूचित जाति) तथा देसाईगंज (पिछड़ा वर्ग महिला) के लिए भी भाजपा में कई इच्छुक हैं। टिकट चयन में पूर्व विधायक कृष्णा गजबे और वरिष्ठ नेता अरविंद पोरेड्डीवार की भूमिका अहम मानी जा रही है। अलग-अलग गुट अपने नेताओं के माध्यम से लॉबिंग कर रहे हैं, जिससे सभी की निगाहें अंतिम सूची पर हैं।
‘परिवर्तन पैनल’ से किसे नुकसान…?
भाजपा आंतरिक गुटबाजी से परेशान है, जबकि कांग्रेस सतर्क रणनीति अपना रही है। कांग्रेस में भी कई इच्छुक हैं। 12 नवंबर को मुंबई में कांग्रेस नेताओं की बैठक होगी, जिसमें उम्मीदवार तय किए जाएंगे। चर्चा है कि भाजपा की सूची घोषित होने के बाद कांग्रेस नाराज और बागी भाजपाइयों को अपने पाले में ले सकती है। कांग्रेस, भाजपा तथा राष्ट्रवादी तीनों दल अपनी-अपनी रणनीति के तहत मतदाताओं को साधने में जुटे हैं। इस बीच गड़चिरोली में आंबेडकरी संगठनों द्वारा गठित ‘परिवर्तन पैनल’ किसे फायदा पहुंचाएगा, यह देखना दिलचस्प रहेगा।





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