मुंबई : अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब भारत के रियल एस्टेट बाजार पर भी दिखने लगा है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के चलते दुबई और खाड़ी देशों में रहने वाले एनआरआई अब मुंबई में शॉर्ट-टर्म किराये के घर तलाश रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में इस तरह की मांग में तेजी आई है, जहां लोग एहतियात के तौर पर भारत में अस्थायी ठिकाना बनाना चाहते हैं.
मुंबई में बढ़ी रेंटल डिमांड
रियल एस्टेट विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले 10 दिनों में दुबई और अन्य खाड़ी देशों से जुड़े एनआरआई की पूछताछ तेजी से बढ़ी है. ज्यादातर लोग 6 महीने से 1 साल तक के लिए घर किराये पर लेना चाहते हैं. यह लोग फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपना रहे हैं, ताकि हालात के हिसाब से आगे का फैसला कर सकें.
किन इलाकों में ज्यादा मांग?
मुंबई के प्रीमियम इलाकों में इस मांग का ज्यादा असर देखा जा रहा है. बांद्रा, खार, अंधेरी, लोवर परेल और साउथ मुंबई जैसे इलाकों में 3-4 BHK फ्लैट्स की डिमांड बढ़ रही है. इन घरों का किराया आमतौर पर 3 लाख से 7-8 लाख रुपये प्रति माह तक है, जो हाई-इनकम वर्ग के लिए उपयुक्त माना जा रहा है.
शॉर्ट-टर्म रेंटल क्या होता है?
शॉर्ट-टर्म रेंटल का मतलब ऐसे घरों से है, जिन्हें कम समय के लिए किराये पर लिया जाता है. यह अवधि कुछ महीनों से लेकर एक साल तक हो सकती है. ऐसे घर पूरी तरह फर्निश्ड होते हैं और इनमें तुरंत रहने की सुविधा मिलती है. हालांकि, महीने के हिसाब से इनका किराया सामान्य लीज से थोड़ा ज्यादा होता है, लेकिन सुविधा और लचीलापन ज्यादा मिलता है.
दुबई बाजार पर क्या असर?
दुबई के रियल एस्टेट बाजार को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा हालात के बावजूद वहां की डिमांड मजबूत बनी हुई है. उन्होंने कहा कि थोड़ी बहुत अनिश्चितता के बावजूद बाजार में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है. सरकार की नीतियां उपभोक्ता भरोसे को बनाए रखने में मदद करती हैं, जिससे बाजार स्थिर रहता है.





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