मुंबई : कौशांबी पुलिस ने देश के संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाने व जासूसी करने के प्रकरण में नौ अन्य आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनमें से पांच आरोपित नाबालिग हैं। एक आरोपित दुर्गेश मुंबई पोर्ट पर ट्रक चालक था और उसने ही पोर्ट की रेकी कर वहां की लोकेशन, वीडियो व फोटो पाकिस्तान भेजे थे। उसी के खाते में पाकिस्तान से फंडिंग आती थी जो वह गिरोह के अन्य सदस्यों के खातों में भेजता था।
आयएसआय एजेंट के सीधा संपर्क में थे आरोपी
पकड़े गए सभी आरोपित पाकिस्तानी आइएसआइ एजेंट के सीधे संपर्क में थे और वाट्सएप ग्रुप से जुड़े हुए थे। मामले में दो आरोपित अभी फरार हैं, जिनके नाम प्रकाश में आए हैं, पुलिस उन्हें तलाश रही है। पुलिस पूर्व में मुख्य आरोपित समेत छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनसे रिमांड पर पूछताछ चल रही है।
इनके अलावा मेरठ, गाजियाबाद और कौशांबी के रहने वाले पांच नाबालिगों को भी पकड़ा गया है।
मुंबई पोर्ट पर ट्रक चालक है दुर्गेश
इनके पास से नौ मोबाइल और 10 सिमकार्ड बरामद हुए हैं। पूछताछ में पता चला है कि दुर्गेश मुंबई पोर्ट पर ट्रक चालक है। उसका संपर्क सुहले से हुआ और सुहेल ने उसका संपर्क पाकिस्तान में बैठे आका से कराया।
इसके बाद उसने मुंबई पोर्ट की फोटो, वीडियो व लोकेशन पाकिस्तान भेजनी शुरू की। दुर्गेश के ही खाते में पाकिस्तानी आका पैसे ट्रांसफर करता था और दुर्गेश बाकी सदस्यों के खाते में भेजता था।
पूछताछ में आरोपितों ने पुलिस को बताया कि कि गिरोह का सरगना सुहेल मलिक है। जबकि उसका सहयोग फरार आरोपित बिहार मुजफ्फपुर निवासी नौशाद अली व बिहार भागलपुर निवासी समीर उर्फ शूटर करते हैं।
पूछताछ में पता चला है कि सभी आरोपित मिलकर सैन्य ठिकानों, कैंट, रेलवे स्टेशनों, प्रमुख स्थानों समेत अन्य की लोकेशन, वीडियो व फोटो तैयार कर पाकिस्तानी नंबर पर भेज रहे थे।
पाकिस्तान से मिली ऑनलाइन ट्रेनिंग
इसके लिए उनके मोबाइल फोन में अलग-अलग एप इंस्टाल कराए गए थे और उन्हें इस्तेमाल करने के लिए पाकिस्तानी आका ने आनलाइन ट्रेनिंग दी थी। पकड़े गए आरोपितों ने पूर्व में गिरफ्तार आरोपितों के साथ मिलकर दिल्ली कैंट रेलवे व पानीपत रेलवे स्टेशन पर सोलर बेस्ड कैमरे लगाए थे।
आरोपितों का कहना है कि उन्हें देश भर में 50 से अधिक स्थानों पर कैमरे लगाने का टास्क मिला था।
भारतीय नंबर पर व्हॉट्सॲप चला रहा है पाकिस्तानी सरगना
पाकिस्तान में बैठा हुआ सरगना भारतीय सिम पर वाट्सएप चला रहा है। इसी नंबर पर वह इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल करता है। गिरोह के सदस्यों ने उसे सिम का नंबर बताया और उसने आरोपितों से ओटीपी लेकर अपना वाट्सएप शुरू किया।





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