भिवंडी : भिवंडी-निज़ामपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के बिजली विभाग ने शहर के 51 स्कूल भवनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लगभग 75 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को मंजूरी और फंडिंग के लिए जिला योजना समिति को भेजा गया है। हालांकि, स्कूलों में सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
राज्य सरकार के निर्देशों के बावजूद, जिनमें स्कूलों में सीसीटीवी सर्विलांस अनिवार्य करने की बात कही गई है, भिवंडी के कई सिविक स्कूल अभी भी बुनियादी सुरक्षा ढांचे के बिना संचालित हो रहे हैं। कैमरे और सुरक्षा कर्मियों की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि इससे हजारों छात्रों और स्कूल संपत्तियों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। फिलहाल, बीएनएमसी कुल 97 स्कूलों का संचालन कर रही है, जिनमें 46 भवनों में 86 प्राथमिक और 11 माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इन स्कूलों में कुल 24,563 छात्र पढ़ते हैं। लेकिन कई स्कूलों में चोरी, तोड़फोड़ और अनधिकृत प्रवेश की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
स्कूल अधिकारियों के अनुसार स्थिति गंभीर होती जा रही है। एक शिक्षक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के कारण जरूरी सामान अक्सर सुरक्षा के लिए स्कूल परिसर के बाहर रखा जाता है। वहीं एक सेंटर हेड ने बताया कि आसपास के बच्चे बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश कर खेलते हैं, जिससे भवन और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है। कई मामलों में सेंधमारी के बाद कंप्यूटर और अन्य कीमती सामान भी चोरी हो चुके हैं।
हालांकि स्थानीय पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में स्कूल स्टाफ और स्थानीय लोगों को खुद आगे आकर स्थिति संभालनी पड़ रही है। कुछ जगहों पर लोगों ने अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था शुरू की है। नारली तालाब भवन में, जहां छह सिविक स्कूल संचालित होते हैं, शिक्षकों ने मिलकर अपने खर्च पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। इसी तरह एक पूर्व छात्र ने स्कूल नंबर 45 में कैमरे लगाने के लिए आर्थिक मदद दी, जो यह दिखाता है कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की कमी के कारण स्थानीय स्तर पर पहल करनी पड़ रही है। इस पूरे मामले ने भिवंडी के सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रस्ताव तैयार होने के बावजूद फंडिंग और गार्ड्स की नियुक्ति पर निर्णय न होने से स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।





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